RAS प्रश्न
बांधेज (बंधनी) तकनीक में क्या किया जाता है?
सही उत्तर: (A) रंगने से पहले छोटी गाँठें बांधना।
बांधेज या बंधनी में कपड़े को रंगने से पहले छोटी-छोटी गाँठों में कसकर बाँधा जाता है, ताकि खोलने पर रंग-बचे हिस्सों से आकृतियाँ उभरें।
व्याख्या
बंधनी का मूल काम रंगने से पहले कपड़े के हिस्सों को बहुत कसकर बाँधना है। कपड़े पर नाखूनों से हजारों छोटी गाँठें बाँधी जाती हैं और फिर उसे रंग में डुबोया जाता है। Britannica भी इसे भारतीय कपड़ा-कला की ऐसी पद्धति बताता है जिसमें रेशम या सूती कपड़े के हिस्से धागे से कसकर बाँधे जाते हैं; रंगाई के बाद धागे खोले जाते हैं और जो हिस्से बंधे थे वे रंग से बचे रहकर आकृति बनाते हैं। इसलिए सही तकनीक कढ़ाई, मशीन छपाई या चित्रकारी नहीं, बल्कि बाँधकर रंगाई करना है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) कढ़ाई में धागे से सतह पर सजावटी टाँके बनाए जाते हैं, जबकि बंधनी में कपड़े को गाँठों में बाँधकर रंग में डुबोया जाता है।
- (C) मशीन छपाई में छाप मशीन से डाली जाती है, जबकि बंधनी की पहचान हाथ से बाँधने और फिर रंगने की प्रक्रिया है।
- (D) चित्रकारी में रंग सीधे बनाकर लगाया जाता है, पर बंधनी में आकृति उन हिस्सों से बनती है जो गाँठों के कारण रंग से बचे रहते हैं।
अवधारणा
राजस्थान की वस्त्र-कला और पारंपरिक शिल्प-पद्धतियों में बंधनी जैसी तकनीकों की पहचान अहम है। RAS में ऐसी तकनीकें इसलिए पूछी जाती हैं क्योंकि कला-संस्कृति में वस्तु, प्रक्रिया और क्षेत्रीय पहचान को अलग-अलग समझना पड़ता है।
