RAS प्रश्न
भीलवाड़ा जिले का बागोर किसका सबसे प्रारंभिक प्रमाण मिलने के कारण महत्त्वपूर्ण माना जाता है?
सही उत्तर: (C) भारतीय उपमहाद्वीप में पशुपालन।
भीलवाड़ा जिले में कोठारी नदी के किनारे स्थित बागोर भारतीय उपमहाद्वीप में पशुपालन के सबसे प्रारंभिक प्रमाण के लिए महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
व्याख्या
भीलवाड़ा जिले में कोठारी नदी के किनारे स्थित बागोर एक प्रमुख मध्य पाषाण स्थल है। यहाँ से भारतीय उपमहाद्वीप में पशुपालन के शुरुआती दौर का महत्त्वपूर्ण प्रमाण मिला है, जिसकी तिथि लगभग 5000 ई.पू. मानी गई है। बागोर भारत के सबसे बड़े मध्य पाषाण स्थलों में से एक है और इसके बारे में विस्तृत पुरातात्त्विक विवरण उपलब्ध है। यहाँ बसावट लगभग 5000-4500 ई.पू. में शुरू हुई मानी जाती है। यहाँ मिली पशुओं की हड्डियाँ इस स्थल को केवल शिकार के बजाय शुरुआती पशुपालन से जोड़ती हैं। इसलिए बागोर का संबंध मध्य पाषाण काल के पशुपालन से है, न कि मृद्भांड, तांबे की तकनीक या धान की खेती से।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) चाक पर बने मृद्भांड बागोर की पहचान नहीं हैं, क्योंकि उनका संबंध बाद के ताम्रपाषाण काल से है।
- (B) तांबा गलाने का प्रमाण गणेश्वर से संबंधित है, बागोर से नहीं।
- (D) धान की खेती के प्रमाण पूर्वी भारत से जुड़े हैं, भीलवाड़ा के बागोर से नहीं।
अवधारणा
राजस्थान के इतिहास, कला और संस्कृति में प्रागैतिहासिक स्थलों का उनके काल और प्रमुख पुरातात्त्विक प्रमाणों से मिलान करके सवाल पूछे जाते हैं। RAS में बागोर और गणेश्वर जैसे स्थल बार-बार आते हैं, क्योंकि स्थल, काल और प्रमाण का यह संबंध महत्त्वपूर्ण है। बागोर का खास संबंध मध्य पाषाण काल में पशुपालन से है।
