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RAS प्रश्न

राजस्थान में बागोर मुख्य रूप से किस काल के स्थल के रूप में जाना जाता है?

सही उत्तर: (A) मध्यपाषाण काल।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में कोठारी नदी के तट पर स्थित बागोर मुख्य रूप से मध्यपाषाण काल का स्थल माना जाता है।

  1. (A)

    मध्यपाषाण काल

  2. (B)

    नवपाषाण काल

  3. (C)

    पुरापाषाण काल

  4. (D)

    ताम्रपाषाण काल

व्याख्या

बागोर की पहचान मध्यपाषाण स्थल के रूप में इसलिए होती है क्योंकि यहाँ पुरातात्विक सामग्री में सूक्ष्म पाषाण औज़ारों की अधिकता है और आरंभिक बसावट शिकार, भोजन जुटाने तथा पशुपालन पर आधारित थी। ईज्ञानकोश की इकाई में बागोर को राजस्थान के उत्खनित मध्यपाषाण स्थलों में शामिल किया गया है और इसे भीलवाड़ा से लगभग 25 किमी पश्चिम, कोठारी नदी के बाएँ तट पर स्थित बताया गया है। वी. एन. मिश्र ने 1973 से 1977 तक इस स्थल का उत्खनन किया था; चरण I में बड़ी संख्या में सूक्ष्म पाषाण औज़ार और पशु-अवशेष मिले। आरंभिक स्तर से ही जंगली और पालतू, दोनों प्रकार की प्रजातियों के प्रमाण मिलते हैं, इसलिए भारतीय उपमहाद्वीप में पशुओं को पालतू बनाने के शुरुआती प्रमाणों की दृष्टि से बागोर महत्वपूर्ण है।

बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं

  • (B) नवपाषाण काल के प्रमुख उदाहरण बुर्जहोम, चिरांद और मेहरगढ़ हैं, जबकि बागोर की पहचान मध्यपाषाण स्थल के रूप में स्थापित है।
  • (C) पुरापाषाण काल से भीमबेटका और अत्तिरमपक्कम जैसे स्थल जुड़े हैं; बागोर सूक्ष्म पाषाण सामग्री और मध्यपाषाण संदर्भ के कारण जाना जाता है।
  • (D) ताम्रपाषाण काल के प्रमुख उदाहरण आहड़, गिलुंड और कायथा हैं, जबकि बागोर की मुख्य पहचान सूक्ष्म पाषाण औज़ारों वाले मध्यपाषाण स्थल के रूप में है।

अवधारणा

यह प्रश्न राजस्थान के प्रागैतिहासिक पुरातात्विक स्थलों को उनके सांस्कृतिक काल और स्थान से जोड़ने की आपकी समझ परखता है, खासकर सूक्ष्म पाषाण औज़ारों से जुड़े मध्यपाषाण स्थलों की। RAS में ऐसे प्रश्न पुरातत्व के बुनियादी स्थल-काल-स्थान संबंधों की समझ परखने के लिए अक्सर पूछे जाते हैं।

स्रोत

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