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RAS प्रश्न

परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (AQR) RBI द्वारा कब की गई थी?

सही उत्तर: (D) 2015।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 1 अप्रैल 2015 से परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (AQR) शुरू की, ताकि बैंक अपनी बैलेंस शीट में छिपे दबाव की स्पष्ट रूप से पहचान करें।

  1. (A)

    2019

  2. (B)

    2017

  3. (C)

    2013

  4. (D)

    2015

व्याख्या

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने गवर्नर रघुराम राजन के कार्यकाल में 2015 में परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (AQR) की। RBI बुलेटिन के अनुसार, बड़े ऋणों पर सूचना का केंद्रीय भंडार (CRILC) बनने और पुनर्गठित खातों के परिसंपत्ति वर्गीकरण में दी गई ढील खत्म होने के बाद 1 अप्रैल 2015 से समीक्षा शुरू करने की घोषणा की गई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बैंक अपनी बैलेंस शीट में छिपे दबाव की पहचान करें। इसके बाद दर्ज सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) का आँकड़ा तेज़ी से बढ़ा। समीक्षा ने नए खराब ऋण पैदा नहीं किए; उसने बैंकों को पहले से दबावग्रस्त ऋणों की पहचान करके उन्हें बही-खातों में दर्ज करने के लिए बाध्य किया। दबावग्रस्त परिसंपत्तियों के लिए 4R रणनीति में यह 'पहचान' का चरण था।

बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं

  • (A) 2019 सही नहीं है। RBI बुलेटिन के अनुसार, 1 अप्रैल 2015 से परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (AQR) शुरू करने की घोषणा की गई थी, इसलिए 2019 तक यह समीक्षा पूरी हो चुकी थी।
  • (B) 2017 सही नहीं है। RBI बुलेटिन के अनुसार, परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (AQR) 1 अप्रैल 2015 से शुरू हुई और पूरी हो चुकी थी; 2017 का लेख बाद में इस प्रक्रिया और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की पहचान की पृष्ठभूमि समझाता है।
  • (C) 2013 बहुत पहले का वर्ष है। RBI बुलेटिन के अनुसार, बड़े ऋणों पर सूचना का केंद्रीय भंडार (CRILC) 2014 में बना और परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (AQR) की घोषणा उसके बाद 2015 में हुई।

अवधारणा

यह प्रश्न बैंकिंग क्षेत्र में दबावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान से जुड़ा है। इसमें खास तौर पर गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की पहचान और बैंकों की बैलेंस शीट में छिपे दबाव पर नियामक की कार्रवाई समझनी होती है। RAS में इस विषय से बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं, क्योंकि इसका संबंध RBI की निगरानी, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सेहत और भारतीय अर्थव्यवस्था की 4R रणनीति से है।

स्रोत

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