RAS प्रश्न
अभिकथन (अ): दिल्ली में कुतुब मीनार के पास स्थित लौह स्तंभ, जो 4थी–5वीं शताब्दी ईसवी का है, 1,600 साल बाद भी अधिकांशतः जंगरहित है। कारण (क): स्तंभ की जंगरोधी क्षमता प्राचीन भारतीय गलाने की प्रक्रिया से उत्पन्न फॉस्फोरस की अधिक मात्रा के कारण है, जिससे एक सुरक्षात्मक निष्क्रिय परत बनती है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
दिल्ली के कुतुब मीनार परिसर में स्थित गुप्तकालीन लौह स्तंभ 1,600 साल से अधिक पुराना होने पर भी काफी हद तक जंगरहित है, क्योंकि उसके लोहे में मौजूद फॉस्फोरस सतह पर आयरन हाइड्रोजन फॉस्फेट हाइड्रेट की पतली सुरक्षात्मक परत बनने में मदद करता है।
व्याख्या
अभिकथन और कारण दोनों सही हैं, तथा कारण अभिकथन की व्याख्या करता है। दिल्ली के कुतुब मीनार परिसर में स्थित यह स्तंभ गुप्त काल, लगभग 400 ईसवी यानी चौथी-पाँचवीं शताब्दी ईसवी, का है और 1,600 साल से अधिक समय बाद भी अपेक्षाकृत जंगरहित है। इसलिए इसका महत्व इतिहास के साथ-साथ धातुकर्म के अध्ययन में भी है। प्राचीन समय में लकड़ी के कोयले से लोहा गलाया जाता था, जिससे उसमें फॉस्फोरस की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक रही। ब्रिटानिका के अनुसार, फॉस्फेट से जुड़ी रासायनिक अभिक्रियाएँ धीरे-धीरे सतह पर आयरन हाइड्रोजन फॉस्फेट हाइड्रेट की पतली सुरक्षात्मक परत बनाती हैं। यह परत आगे होने वाले ऑक्सीकरण की गति कम करती है और इसी कारण स्तंभ में जंग बहुत कम लगी है।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (B) विकल्प B गलत है, क्योंकि कारण न तो अलग है और न ही असंबद्ध। फॉस्फोरस से जुड़ी अभिक्रियाओं से बनने वाली सुरक्षात्मक फॉस्फेट परत ही बताती है कि स्तंभ में जंग बहुत कम क्यों लगी है।
- (C) विकल्प C में कारण को गलत माना गया है, जबकि फॉस्फोरस से जुड़ी रासायनिक अभिक्रियाएँ और सुरक्षात्मक परत ही स्तंभ की जंगरोधी क्षमता की व्याख्या करती हैं।
- (D) विकल्प D में अभिकथन को गलत माना गया है, जबकि ब्रिटानिका स्तंभ को 1,600 साल से अधिक पुराना और अपेक्षाकृत जंगरहित बताती है।
अवधारणा
यह प्रश्न गुप्तकालीन भारत के धातुकर्म और तकनीकी उपलब्धियों की समझ जांचता है। RAS में ऐसे उदाहरण अक्सर पूछे जाते हैं, क्योंकि वे केवल राजवंशों के कालक्रम पर निर्भर रहने के बजाय सांस्कृतिक इतिहास और विज्ञान-प्रौद्योगिकी को भौतिक साक्ष्यों से जोड़ते हैं।
