RAS प्रश्न
अभिकथन (A): पाणिनि की अष्टाध्यायी को भाषाविज्ञान के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है। कारण (R): अष्टाध्यायी में 3,959 सूत्र (नियम) हैं, जो एक जनरेटिव नियम-प्रणाली के ज़रिए संस्कृत व्याकरण का वर्णन गणितीय सटीकता के साथ करते हैं।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
पाणिनि की अष्टाध्यायी भाषाविज्ञान की बड़ी उपलब्धि इसलिए मानी जाती है क्योंकि उसके 3,959 सूत्र संस्कृत व्याकरण को अत्यंत संक्षिप्त, औपचारिक और जनरेटिव नियम-प्रणाली में बांधते हैं।
व्याख्या
अभिकथन और कारण दोनों सही हैं, और कारण सीधे अभिकथन से जुड़ता है। पाणिनि की अष्टाध्यायी को प्राचीन भारतीय विद्या-परंपरा में व्याकरण और भाषाविज्ञान का आधारग्रंथ माना गया है। पाणिनि संस्कृत रूप-रचना के नियमों के लिए प्रसिद्ध हैं, और अष्टाध्यायी संस्कृत के आरंभिक ज्ञात व्याकरणों का आधार है। इसके 3,959 नियम वर्णनात्मक और जनरेटिव भाषाविज्ञान के आरंभ से जुड़े माने जाते हैं। इसलिए इसका महत्व केवल संस्कृत व्याकरण के निरूपण तक सीमित नहीं है; इसकी असली विशेषता नियमों की ऐसी औपचारिक, सटीक और संक्षिप्त प्रणाली है जिसके कारण इसे भाषाविज्ञान की बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) B इसलिए गलत है क्योंकि कारण अलग बात नहीं कहता; 3,959 सूत्रों और जनरेटिव नियम-प्रणाली के कारण ही अष्टाध्यायी इतनी बड़ी भाषावैज्ञानिक उपलब्धि मानी जाती है।
- (C) C इसलिए गलत है क्योंकि कारण भी सही है; पाणिनि के 3,959 नियम और अष्टाध्यायी का वर्णनात्मक तथा जनरेटिव भाषाविज्ञान से संबंध स्वीकार किया जाता है।
- (D) D इसलिए गलत है क्योंकि अभिकथन भी सही है; अष्टाध्यायी को संस्कृत व्याकरण का आधारग्रंथ और भाषाविज्ञान के इतिहास की आरंभिक बड़ी कृति माना गया है।
अवधारणा
यह प्रसंग प्राचीन भारत की बौद्धिक उपलब्धियों, खासकर व्याकरण और भाषाविज्ञान, से जुड़ा है। RAS में ऐसे विषय बार-बार आते हैं क्योंकि वे केवल नाम-तारीख नहीं, बल्कि किसी ग्रंथ के ऐतिहासिक महत्व और उसके कारण को परखते हैं।
