RAS प्रश्न
आर्यभट्ट के योगदान में शामिल हैं:
सही उत्तर: (A) पाई का मान, पृथ्वी का घूर्णन, सौर मंडल, दशमलव स्थान मान प्रणाली।
आर्यभट्ट के योगदान में पाई का 3.1416 के करीब मान, पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना, सौर व्यवस्था से जुड़े खगोलीय विचार और दशमलव स्थानीय मान प्रणाली का उपयोग शामिल हैं।
व्याख्या
आर्यभट्ट (476–550 ई.) को केवल खगोलविद मानना अधूरा है, क्योंकि उनका काम गणित और खगोल दोनों में फैला था। आर्यभटीय के गणित-पाद में पाई का मान 62832/20000, यानी 3.1416, बताया गया है। स्थानीय मान प्रणाली भी उनके काम में स्पष्ट रूप से मौजूद थी। खगोल में उन्होंने गति की सापेक्षता समझाते हुए पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने की बात रखी और सूर्य तथा चंद्र ग्रहण की व्याख्या भी उनके प्रमुख विचारों में गिनी जाती है। इसलिए विकल्प A सही है: इसमें गणित, पृथ्वी-घूर्णन और खगोल, तीनों तरह के योगदान एक साथ आते हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) केवल खगोल कहना गलत है, क्योंकि पाई के मान और स्थानीय मान प्रणाली जैसे गणितीय योगदान भी आर्यभट्ट से जुड़े हैं।
- (C) केवल चिकित्सा कहना गलत है, क्योंकि आर्यभट्ट के ये योगदान गणित और खगोल से जुड़े हैं, चिकित्सा से नहीं।
- (D) केवल कविता कहना गलत है, क्योंकि प्रश्न में दर्ज प्रमुख योगदान पाई, पृथ्वी-घूर्णन, ग्रहण-व्याख्या और स्थानीय मान प्रणाली जैसे वैज्ञानिक-गणितीय विषयों से हैं।
अवधारणा
यह प्रश्न प्राचीन भारत के विज्ञान और गणित में आर्यभट्ट की भूमिका जांचता है। RAS में ऐसे तथ्य बार-बार पूछे जाते हैं क्योंकि वे सांस्कृतिक इतिहास को विज्ञान-परंपरा और गणितीय उपलब्धियों से जोड़ते हैं।
