RAS प्रश्न
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने के अधिकार की गारंटी देता है। यह अधिकार किसे उपलब्ध है?
सही उत्तर: (C) सभी व्यक्तियों को — नागरिक और गैर-नागरिक दोनों।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को मानने, आचरण करने तथा प्रचार करने का अधिकार सभी व्यक्तियों को देता है, इसलिए यह नागरिकों और गैर-नागरिकों दोनों पर लागू है।
व्याख्या
अनुच्छेद 25(1) में अधिकार पाने वालों के लिए नागरिक शब्द नहीं रखा गया है; उसमें सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, आचरण करने तथा प्रचार करने का अधिकार समान रूप से दिया गया है। इसी शब्द-चयन से स्पष्ट होता है कि यह अधिकार केवल भारतीय नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि गैर-नागरिकों पर भी लागू होता है। लेकिन यह स्वतंत्रता निरंकुश नहीं है। यह लोक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य और भाग 3 के अन्य प्रावधानों के अधीन है। इसलिए अनुच्छेद 25 का संरक्षण व्यापक है, पर संवैधानिक सीमाओं के भीतर चलता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) केवल भारतीय नागरिक कहना गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 25 अधिकार को नागरिकता से नहीं बांधता और सभी व्यक्तियों को समान रूप से पात्र मानता है।
- (B) केवल हिंदू नागरिक कहना गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 25 का मुख्य अधिकार किसी एक धर्म या केवल हिंदू नागरिकों तक सीमित नहीं है।
- (D) केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों तक सीमित करना गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 25 अल्पसंख्यक शब्द से सीमा नहीं बनाता और सभी व्यक्तियों को संरक्षण देता है।
अवधारणा
मौलिक अधिकारों में धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक बनाम व्यक्ति की संवैधानिक भाषा का फर्क महत्वपूर्ण है। RAS में ऐसे बिंदु इसलिए बार-बार आते हैं क्योंकि कई अधिकार नागरिकों तक सीमित हैं, जबकि कुछ अधिकार सभी व्यक्तियों को मिलते हैं।
