RAS प्रश्न
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 कहता है: 'किसी भी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से ___ द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा।'
सही उत्तर: (C) विधि।
किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से केवल विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है।
व्याख्या
अनुच्छेद 21 जीवन और दैहिक स्वतंत्रता की रक्षा का मूल संवैधानिक प्रावधान है। भारत का संविधान किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से केवल विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित करने की अनुमति देता है। इसलिए सही संवैधानिक शब्द विधि है, किसी संस्था का नाम नहीं। मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह प्रक्रिया न्यायसंगत, उचित और युक्तियुक्त होनी चाहिए। इस तरह अनुच्छेद 21 में विधि केवल खाली औपचारिक शब्द नहीं है; वही प्राण और दैहिक स्वतंत्रता से वंचित करने की प्रक्रिया की वैध कसौटी बनती है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) संसद गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 21 में प्रक्रिया किसी संस्था द्वारा नहीं, विधि द्वारा स्थापित मानी गई है।
- (B) कार्यपालिका गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 21 जीवन और दैहिक स्वतंत्रता से वंचित करने को कार्यपालिका की प्रक्रिया से नहीं, विधि की प्रक्रिया से जोड़ता है।
- (D) न्यायालय गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 21 में न्यायालय नहीं, विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया निर्णायक है।
अवधारणा
मौलिक अधिकारों में अनुच्छेद 21 की भाषा और उसका न्यायिक अर्थ अत्यंत महत्वपूर्ण है। RAS में यह बार-बार इसलिए आता है, क्योंकि जीवन और दैहिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे शासन और संविधान दोनों से सीधे जुड़ते हैं।
