RAS प्रश्न
अनुच्छेद 123 के तहत जारी अध्यादेश संसद के समक्ष रखे जाने चाहिए और प्रभावहीन हो जाते हैं:
सही उत्तर: (A) दोनों सदनों के पुनः एकत्र होने के 6 सप्ताह बाद।
अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश संसद के पुनः एकत्र होने के 6 सप्ताह बाद प्रभावी नहीं रहता, जब तक संसद उसे आगे कानून के रूप में स्वीकार न करे।
व्याख्या
अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को संसद के अवकाश में, जब दोनों सदन सत्र में न हों और तत्काल कार्रवाई जरूरी हो, अध्यादेश जारी करने की शक्ति देता है। लेकिन यह शक्ति स्थायी कानून बनाने का रास्ता नहीं है। संविधान कहता है कि ऐसा हर अध्यादेश संसद के दोनों सदनों के सामने रखा जाएगा और संसद के पुनः एकत्र होने के 6 सप्ताह पूरे होते ही उसका प्रभाव समाप्त हो जाएगा। अगर दोनों सदन अलग-अलग तारीखों पर पुनः एकत्र हों, तो 6 सप्ताह की गिनती बाद वाली तारीख से होगी। यदि उस अवधि से पहले दोनों सदन अध्यादेश को अस्वीकृत कर दें, तो दूसरे अस्वीकृति प्रस्ताव के पारित होते ही वह समाप्त हो जाता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) 1 वर्ष बाद की अवधि अनुच्छेद 123 में नहीं दी गई है; अध्यादेश की समय-सीमा संसद के पुनः एकत्र होने से जुड़ी है, जारी होने की तारीख से नहीं।
- (C) 3 महीने बाद जारी होने से स्वतः समाप्ति का नियम अनुच्छेद 123 में नहीं है; संविधान 6 सप्ताह और संसद के पुनः एकत्र होने को आधार बनाता है।
- (D) 30 दिन बाद पुनः एकत्रित होने का विकल्प गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 123 स्पष्ट रूप से 6 सप्ताह कहता है, 30 दिन नहीं।
अवधारणा
यह प्रश्न राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति और संसद के नियंत्रण की संवैधानिक सीमा को जांचता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि अनुच्छेद 123 कार्यपालिका की तात्कालिक शक्ति और विधायिका की अंतिम भूमिका के बीच संतुलन दिखाता है।
