RAS प्रश्न
अराइश एक पारंपरिक राजस्थानी कला तकनीक है। इसमें क्या किया जाता है?
सही उत्तर: (B) गीले चूने के प्लास्टर पर फ्रेस्को चित्रकारी।
अराइश राजस्थान की गीले चूने के प्लास्टर पर रंग लगाने वाली फ्रेस्को तकनीक है।
व्याख्या
अराइश को समझने की कुंजी इसका आधार है: रंग कैनवास, कागज या छपी सतह पर नहीं, बल्कि गीले चूने के प्लास्टर पर लगाए जाते हैं। सूखने पर ये रंग स्थायी हो जाते हैं। आईआईसीडी के शेखावाटी फ्रेस्को लेख में भी फ्रेस्को को पुरानी चित्रकला तकनीक बताया गया है, जिसमें रंग सीधे ताजे, गीले चूने के प्लास्टर पर लगाए जाते हैं और इससे चित्र में टिकाऊपन आता है। उसी लेख में गीले चूने के प्लास्टर वाले फ्रेस्को कार्य के प्रचलित नामों में अराइश भी दिया गया है। इसलिए सही पहचान गीले प्लास्टर पर चूना फ्रेस्को चित्रकारी है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) कैनवास पर तेल चित्रकारी अलग माध्यम है, जबकि अराइश दीवार के गीले चूने के प्लास्टर पर की जाने वाली फ्रेस्को तकनीक है।
- (C) डिजिटल प्रिंटिंग आधुनिक छपाई प्रक्रिया है, जबकि अराइश पारंपरिक फ्रेस्को कार्य है जिसमें रंग गीले चूने के प्लास्टर पर लगाए जाते हैं।
- (D) कागज पर जल रंग में आधार कागज होता है, जबकि अराइश दीवार/प्लास्टर आधारित कला है और उसका आधार गीला चूना प्लास्टर है।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान की पारंपरिक चित्रकला तकनीकों और उनके माध्यम की पहचान जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि कला-शैली, सामग्री और क्षेत्रीय विरासत को अलग-अलग पहचानना पड़ता है।
