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RAS प्रश्न

भारतीय अदालतों में लगभग कितने मामले लंबित हैं?

सही उत्तर: (C) 5 करोड़ से अधिक।

भारतीय अदालतों और अधिकरणों में लंबित मामलों की संख्या 5 करोड़ से अधिक है।

  1. (A)

    1 करोड़ से अधिक

  2. (B)

    3 करोड़ से अधिक

  3. (C)

    5 करोड़ से अधिक

  4. (D)

    10 करोड़ से अधिक

व्याख्या

“लगभग” शब्द यहां महत्वपूर्ण है, क्योंकि आंकड़ा पूरे देश की अदालतों और अधिकरणों में लंबित मामलों से जुड़ा है। लोक सभा में विधि और न्याय मंत्रालय ने नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के आंकड़ों का हवाला देते हुए देश की अलग-अलग अदालतों और अधिकरणों में 5 करोड़ से अधिक मामले लंबित बताए। केंद्र सरकार से जुड़े मामलों का अलग आंकड़ा 7,26,901 है, इसलिए कुल न्यायिक लंबित मामलों का पैमाना उससे कहीं बड़ा है। इसी कारण 5 करोड़ से अधिक वाला विकल्प सही है। न्याय सेतु जैसी पहलें मुकदमे से पहले समाधान के जरिए इस बोझ को कम करने के उद्देश्य से जुड़ी हैं।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) 1 करोड़ से अधिक कहना कुल लंबित मामलों के पैमाने को बहुत कम दिखाता है, क्योंकि लोक सभा में विधि और न्याय मंत्रालय ने संख्या 5 करोड़ से अधिक बताई है।
  • (B) 3 करोड़ से अधिक भी सही सीमा नहीं है, क्योंकि नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के आंकड़े 5 करोड़ से अधिक लंबित मामलों की स्थिति दिखाते हैं।
  • (D) 10 करोड़ से अधिक का दावा विधि और न्याय मंत्रालय के लोक सभा उत्तर से समर्थित नहीं है; दर्ज पैमाना 5 करोड़ से अधिक है।

अवधारणा

न्यायपालिका में लंबित मामलों और न्यायिक सुधार से जुड़े शासन-विषयक तथ्य RAS के लिए महत्वपूर्ण हैं। न्याय तक पहुंच, मुकदमेबाजी का बोझ और सुधार-पहलें सीधे संवैधानिक शासन से जुड़ती हैं।

स्रोत

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