RAS प्रश्न
ब्याज या मूलधन कितने दिनों तक अतिदेय रहने पर किसी परिसंपत्ति को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है?
सही उत्तर: (B) 90 दिन।
किसी मियादी ऋण में ब्याज या मूलधन की किस्त 90 दिनों से अधिक अतिदेय रहने पर वह ऋण गैर-निष्पादित परिसंपत्ति माना जाता है।
व्याख्या
भारतीय रिजर्व बैंक के मास्टर परिपत्र में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति की पहचान वसूली की वास्तविक स्थिति से जुड़ी है। मियादी ऋण के लिए नियम साफ है: ब्याज या मूलधन की किस्त 90 दिनों से अधिक अतिदेय रहे, तो वह ऋण या अग्रिम गैर-निष्पादित परिसंपत्ति माना जाता है। इसलिए 90 दिन निर्णायक सीमा है, 30 या 60 दिन नहीं। इसी परिपत्र में अतिदेय का अर्थ है कि बैंक द्वारा तय देय तिथि पर देय राशि न चुकाई जाए। कृषि ऋणों में अलग आधार लागू होता है: छोटी अवधि की फसल के लिए 2 फसल मौसम और लंबी अवधि की फसल के लिए 1 फसल मौसम।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) 60 दिन गैर-निष्पादित परिसंपत्ति की सीमा नहीं है; यह केवल शुरुआती तनाव की श्रेणी से जुड़ता है, जबकि मियादी ऋण के लिए सीमा 90 दिनों से अधिक अतिदेय रहना है।
- (C) 30 दिन पर खाता गैर-निष्पादित परिसंपत्ति नहीं बनता; यह भुगतान में शुरुआती तनाव दिखा सकता है, पर निर्णायक वर्गीकरण 90 दिनों से अधिक अतिदेय रहने पर होता है।
- (D) 180 दिन पहला वर्गीकरण बिंदु नहीं है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक का नियम मियादी ऋण को 90 दिनों से अधिक अतिदेय रहने पर ही गैर-निष्पादित परिसंपत्ति मानता है।
अवधारणा
भारतीय अर्थव्यवस्था में बैंकिंग क्षेत्र के परिसंपत्ति-वर्गीकरण और आय-मान्यता नियम में यह अवधारणा केंद्रीय है। आरएएस में यह अवधारणा इसलिए दोहराई जाती है क्योंकि बैंकिंग अनुशासन और ऋण-वसूली की बुनियादी समझ इसी सीमा से शुरू होती है।
