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RAS प्रश्न

लांगा संगीतकारों द्वारा बजाया जाने वाला विशिष्ट वाद्य यंत्र अलगोज़ा, एक है:

सही उत्तर: (B) चक्रीय श्वास से एक साथ बजाई जाने वाली बाँस की दो बाँसुरियों की जोड़ी।

अलगोज़ा बाँस या लकड़ी की दो बाँसुरियों का जोड़ा है, जिन्हें चक्रीय श्वास की मदद से एक साथ बजाया जाता है।

  1. (A)

    घंटा वाद्य

  2. (B)

    चक्रीय श्वास से एक साथ बजाई जाने वाली बाँस की दो बाँसुरियों की जोड़ी

  3. (C)

    एक तार वाला लोक वाद्य

  4. (D)

    बड़ा ढोल

व्याख्या

अलगोज़ा को घंटा, तार या ढोल वाद्य समझना भूल होगी, क्योंकि इसका मूल रूप दो बाँसुरी-जैसी नलियों का जोड़ा है। ये बाँस या लकड़ी की बनी होती हैं; एक नली धुन देती है और दूसरी लगातार आधार-स्वर देती रहती है। Horniman Museum के संग्रह-विवरण में भी अलगोज़ा को दो नलीदार बाँसुरियों का जोड़ा बताया गया है और कहा गया है कि दोनों वाद्य एक साथ फूँके जाते हैं। लगातार ध्वनि के लिए वादक चक्रीय श्वास का उपयोग करता है। इसी कारण अलगोज़ा की आवाज़ भरपूर और निरंतर लगती है। यह लांगा संगीतकारों का खास वाद्य है और सिंधी तथा बलूच लोक संगीत में भी बजाया जाता है।

बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं

  • (A) घंटा वाद्य में धातु या घंटी जैसी चोट से ध्वनि बनती है, जबकि अलगोज़ा दो फूँककर बजाई जाने वाली बाँसुरी-नलियों का जोड़ा है।
  • (C) एक तार वाला लोक वाद्य तार के कंपन से बजता है, जबकि अलगोज़ा में ध्वनि हवा फूँकने और दो नलियों को साथ बजाने से बनती है।
  • (D) बड़ा ढोल ताल देने वाला अवनद्ध वाद्य होता है, जबकि अलगोज़ा ढोल नहीं बल्कि लगातार फूँककर बजाया जाने वाला सुषिर वाद्य है।

अवधारणा

यह प्रश्न राजस्थान की लोक-संगीत परंपरा में समुदाय-विशेष और वाद्य-विशेष की पहचान जाँचता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि लांगा जैसे लोक कलाकार और उनके वाद्य राजस्थान की कला-संस्कृति के स्थायी हिस्से हैं।

स्रोत

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