RAS प्रश्न
अकबर की मनसबदारी प्रणाली मुख्य रूप से किसकी प्रणाली थी?
सही उत्तर: (A) दोहरी पदवी (ज़ात और सवार) के साथ सैन्य और नागरिक पद।
अकबर की मनसबदारी प्रणाली मूलतः ज़ात और सवार की दोहरी पदवी पर आधारित सैन्य-नागरिक पद-प्रणाली थी।
व्याख्या
मनसबदारी का अर्थ केवल कोई जमीन या कर-वसूली का अधिकार नहीं था; यह मुगल प्रशासन में पद, वेतन, प्रतिष्ठा और सैन्य जिम्मेदारी तय करने की प्रणाली थी। ज़ात से मनसबदार का निजी पद, वेतन और दर्जा तय होता था, जबकि सवार से यह तय होता था कि उसे कितने घुड़सवार रखने होंगे। एनसीईआरटी स्रोत भी मनसबदारों को मुगल प्रशासन के ऊपरी ढांचे में रखता है और बताता है कि वे नागरिक तथा सैन्य, दोनों तरह के काम देखते थे। इसलिए सही विकल्प वह है जिसमें सैन्य और नागरिक पद के साथ ज़ात-सवार की दोहरी पदवी दी गई है। इसी व्यवस्था से सम्राट अमीरों पर नियंत्रण रखता था, और पद वंशानुगत नहीं थे।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) भू-राजस्व मुगल राज्य की आय का बड़ा आधार था, लेकिन मनसबदारी केवल राजस्व-वसूली नहीं थी; इसमें पद, वेतन, प्रतिष्ठा और घुड़सवारों की जिम्मेदारी भी तय होती थी।
- (C) यह धार्मिक पदानुक्रम नहीं था, क्योंकि NCERT मनसबदारों को नागरिक और सैन्य प्रशासन से जोड़ता है, धार्मिक अधिकारियों की श्रेणी से नहीं।
- (D) वंशानुगत सामंती अनुदान वाला विकल्प गलत है, क्योंकि मनसबदारी गैर-वंशानुगत थी और पद सम्राट के नियंत्रण में थे।
अवधारणा
यह प्रश्न मध्यकालीन भारत में मुगल प्रशासन, खासकर मनसबदारी और अमीर वर्ग पर शाही नियंत्रण की समझ जांचता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि इसी से राजस्व व्यवस्था, सेना और प्रशासनिक पदों का अंतर साफ होता है।
