RAS प्रश्न
अकबर का 'दीन-ए-इलाही' क्या था?
सही उत्तर: (B) विभिन्न धर्मों के तत्वों को मिलाकर बनाया गया एक समन्वित धार्मिक पंथ।
अकबर का दीन-ए-इलाही विभिन्न धर्मों के तत्वों को मिलाकर बनाया गया एक समन्वित धार्मिक पंथ था।
व्याख्या
दीन-ए-इलाही, जिसे ‘दैवी विश्वास’ भी कहा गया, अकबर द्वारा 1582 में प्रवर्तित एक समन्वित धार्मिक पंथ था। इसमें इस्लाम, हिंदू धर्म, ईसाई धर्म, पारसी धर्म और जैन धर्म के तत्व लिए गए थे। Britannica के अनुसार अकबर ने 16वीं सदी के उत्तरार्ध में यह सीमित, विविध तत्वों वाला धार्मिक आंदोलन बनाया था, जिसमें पवित्रता, संयम और दया जैसे नैतिक गुणों पर बल था। इसके अनुष्ठानों में पारसी धर्म से प्रकाश, सूर्य और अग्नि से जुड़ी धारणा तथा हिंदू परंपरा से सूर्य के नामों का पाठ जैसे तत्व आए। इसलिए विकल्प B सही है: यह न सैन्य व्यवस्था थी, न कर नीति, बल्कि धार्मिक-नैतिक समन्वय का प्रयास था। इसे औपचारिक रूप से बहुत कम लोगों ने अपनाया और अकबर के बाद यह टिक नहीं सका।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) दीन-ए-इलाही का संबंध सैनिकों की भर्ती, संगठन या सैन्य प्रशासन से नहीं था; यह अकबर का धार्मिक-नैतिक आंदोलन था।
- (C) यह कट्टर इस्लामी सुधार आंदोलन नहीं था, क्योंकि इसमें इस्लाम के साथ हिंदू, पारसी और जैन परंपराओं जैसे कई धर्मों के तत्व शामिल थे।
- (D) यह राजस्व वसूली या कर-सुधार की नीति नहीं थी; इसकी पहचान नैतिक गुणों और धार्मिक अनुष्ठानों वाले पंथ के रूप में थी।
अवधारणा
अकबर की धार्मिक नीति और सांस्कृतिक समन्वय मध्यकालीन भारत की समझ के लिए महत्वपूर्ण हैं। RAS में यह विषय बार-बार आता है क्योंकि मुगल शासन, धार्मिक सहिष्णुता और राज्य-समाज संबंधों को जोड़कर पूछा जाता है।
