RAS प्रश्न
आहाड़ (ताम्बवती) को 'तांबे का स्थान' कहा जाता है क्योंकि:
सही उत्तर: (B) वहाँ बड़ी मात्रा में तांबे की वस्तुएँ मिलीं।
आहाड़, जिसे ताम्बवती भी कहा जाता है, तांबे वाली जगह के रूप में जाना जाता है क्योंकि वहाँ तांबे की बहुत-सी वस्तुएँ मिली हैं।
व्याख्या
आहाड़ उदयपुर के पास दक्षिण-पूर्वी राजस्थान की बनास घाटी में स्थित एक ताम्रपाषाणिक स्थल है और आहाड़-गिलुंड समूह से जुड़ा है। आर. एस. शर्मा ने अपनी पुस्तक इंडियाज़ एंशिएंट पास्ट में लिखा है कि इस समूह की बस्तियों, खासकर आहाड़ और गिलुंड, से तांबे की बहुत-सी वस्तुएँ मिली हैं। आहाड़ से तांबे की सपाट कुल्हाड़ियाँ, चूड़ियाँ और चादरें मिली हैं। यहाँ तांबा स्थानीय रूप से उपलब्ध था और यहाँ के लोग शुरू से ही तांबा गलाने और धातु की वस्तुएँ बनाने का काम करते थे। इसलिए ताम्बवती का अर्थ तांबे वाली जगह है। इस नाम का आधार स्थल पर मिली तांबे की अनेक वस्तुएँ हैं; यह नाम तांबे के सिक्कों की पहली ढलाई, वहाँ तांबे की खदानें होने या तांबा पहली बार वहीं गलाए जाने के कारण नहीं पड़ा। काले-लाल मृद्भांड और यहाँ का ग्रामीण ताम्रपाषाणिक परिवेश भी इस स्थल की पहचान स्पष्ट करते हैं।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) आहाड़ के ताम्बवती नाम का संबंध वहाँ मिली तांबे की वस्तुओं से है, तांबे के सिक्कों की पहली ढलाई से नहीं।
- (C) तांबा स्थानीय रूप से उपलब्ध था, लेकिन ताम्बवती नाम का आधार वहाँ मिली तांबे की वस्तुएँ हैं; तांबे की खदानों को इस नाम का कारण नहीं बताया गया है।
- (D) आहाड़ के लोग शुरू से ही धातु गलाने और धातुकर्म में लगे थे, लेकिन तांबा पहली बार वहीं नहीं गलाया गया था।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान की ताम्रपाषाणिक संस्कृतियों, खासकर आहाड़-बनास परंपरा, की समझ और पुरातात्त्विक अवशेषों से आहाड़ जैसे स्थलों की पहचान करने की क्षमता जाँचता है। RAS में ऐसे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, जिनमें राजस्थान के प्रागैतिहासिक स्थलों को वहाँ मिली वस्तुओं, मृद्भांड और क्षेत्रीय संस्कृतियों से जोड़ना होता है।
