RAS प्रश्न
20 नवंबर 2025 के सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के निर्णय के अनुसार, राज्यपाल के समक्ष किसी राज्य विधेयक को स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किए जाने पर उनके पास कितने विकल्प होते हैं?
सही उत्तर: (A) तीन — स्वीकृति देना, विधानमंडल को वापस करना, या राष्ट्रपति के लिए सुरक्षित रखना।
20 नवंबर 2025 के सर्वोच्च न्यायालय की 5 न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के अनुसार, राज्यपाल के पास राज्य विधेयक पर स्वीकृति देने, उसे पुनर्विचार के लिए विधानमंडल को लौटाने या राष्ट्रपति के लिए सुरक्षित रखने के 3 विकल्प होते हैं।
व्याख्या
राज्यपाल राज्य विधानमंडल से पारित विधेयक को अनिश्चित समय तक अपने पास रोककर नहीं रख सकते। संविधान पीठ ने अनुच्छेद 200 के संदर्भ में राज्यपाल के 3 संवैधानिक विकल्प बताए: विधेयक को स्वीकृति देना, उसे टिप्पणियों सहित विधानमंडल को पुनर्विचार के लिए लौटाना, या राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रखना। अदालत ने तय समय-सीमा थोपने से इनकार किया, लेकिन यह भी साफ किया कि लंबी और बिना स्पष्टीकरण वाली देरी विधायी प्रक्रिया को बाधित करती है। इसलिए विकल्पों की संख्या 3 है; विधेयक को अनिश्चितकाल तक दबाए रखना अलग विकल्प नहीं है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) B गलत है, क्योंकि यह विधानमंडल को पुनर्विचार के लिए विधेयक लौटाने वाले विकल्प को हटा देता है, जबकि निर्णय ने उसे 3 विकल्पों में शामिल माना।
- (C) C गलत है, क्योंकि अनिश्चितकाल तक विधेयक रोककर रखना संविधान पीठ के अनुसार वैध चौथा विकल्प नहीं है।
- (D) D गलत है, क्योंकि निर्णय ने 30 दिनों में अनिवार्य स्वीकृति का नियम नहीं बनाया और राज्यपाल को केवल स्वीकृति देने तक सीमित भी नहीं किया।
अवधारणा
राज्यपाल की विधायी भूमिका, अनुच्छेद 200 और संघीय संतुलन राज्य-शासन की संवैधानिक समझ के मुख्य हिस्से हैं। RAS में यह विषय बार-बार आता है क्योंकि राज्यपाल, विधानमंडल और न्यायिक समीक्षा के रिश्ते सीधे राज्य-शासन से जुड़े हैं।
