RAS प्रश्न
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को राष्ट्रपति केवल किसके बाद हटा सकता है?
सही उत्तर: (C) संसद के प्रत्येक सदन द्वारा विशेष बहुमत से संबोधन।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को राष्ट्रपति तभी हटा सकता है, जब संसद के प्रत्येक सदन ने विशेष बहुमत से हटाने का संबोधन राष्ट्रपति को प्रस्तुत किया हो।
व्याख्या
अनुच्छेद 124(4) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया को बहुत कठोर बनाता है। राष्ट्रपति सीधे आदेश देकर न्यायाधीश को नहीं हटा सकता; पहले संसद के दोनों सदनों में हटाने का संबोधन पारित होना जरूरी है। यह संबोधन उसी सत्र में राष्ट्रपति को प्रस्तुत किया जाता है और उसे सदन की कुल सदस्यता के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत का समर्थन चाहिए। हटाने का आधार भी सामान्य असहमति नहीं, बल्कि सिद्ध दुराचार या असमर्थता होना चाहिए। इसलिए सही उत्तर C है: प्रत्येक सदन का विशेष बहुमत वाला संबोधन।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) भारत के मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश अकेले हटाने की संवैधानिक शर्त नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद 124(4) संसद के प्रत्येक सदन के विशेष बहुमत वाले संबोधन को आवश्यक बनाता है।
- (B) महान्यायवादी की सिफारिश से न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, क्योंकि हटाने का आदेश राष्ट्रपति तभी दे सकता है जब दोनों सदनों का अपेक्षित संबोधन प्रस्तुत हो।
- (D) केवल लोकसभा का साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद 124(4) दोनों सदनों में कुल सदस्यता के बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वालों के कम-से-कम दो-तिहाई समर्थन की मांग करता है।
अवधारणा
यह प्रश्न न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की पद-सुरक्षा से जुड़ा है। RAS में यह बार-बार इसलिए आता है, क्योंकि संविधान ने न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया को सामान्य राजनीतिक बहुमत से अलग और कठिन बनाया है।
