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MCQ

संचार प्रणालियों के मूल सिद्धांत MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए संचार प्रणालियों के मूल सिद्धांत के 44 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1GSM रेडियो एक्सेस के छोटे तकनीकी परिचय के लिए कौन-सी जोड़ी सबसे सटीक है?

A डिजिटल समय-स्लॉट संरचना के बिना एनालॉग FM वॉइस चैनल
B केवल QAM के साथ OFDMA, मुख्यतः चौथी पीढ़ी पैकेट रेडियो इंटरफेस
C मुख्य एक्सेस विधि के रूप में अलग स्प्रेडिंग कोड वाला डायरेक्ट-सीक्वेंस CDMA
D आवृत्ति-विभाजन द्वैध वाहक पर TDMA सिग्नलिंग के साथ GMSK मॉड्युलेशन
व्याख्या

GSM एक 2जी डिजिटल सेल्युलर सिस्टम है। इसके रेडियो एक्सेस को आम तौर पर युग्मित आवृत्ति-विभाजन द्वैध वाहक पर TDMA सिग्नलिंग और GMSK मॉड्युलेशन के रूप में पढ़ाया जाता है। परीक्षा में GSM और CDMA को गड़बड़ करना आम फंदा है: GSM रेडियो वाहक पर यूजरों को समय स्लॉट में बांटता है, जबकि CDMA यूजरों को मुख्यतः कोड से अलग करता है।

प्र.2मुक्त आकाश में एक समान समतल विद्युतचुंबकीय तरंग धनात्मक z दिशा में चल रही है। किसी क्षण और बिंदु पर उसका विद्युत क्षेत्र धनात्मक x दिशा में है। कौन-सा कथन सही है?

A चुंबकीय क्षेत्र धनात्मक z दिशा में है और विद्युत-क्षेत्र आयाम/चुंबकीय-क्षेत्र आयाम = प्रकाश की चाल।
B चुंबकीय क्षेत्र ऋणात्मक y दिशा में है और चुंबकीय-क्षेत्र आयाम/विद्युत-क्षेत्र आयाम = प्रकाश की चाल।
C चुंबकीय क्षेत्र धनात्मक y दिशा में है और चुंबकीय-क्षेत्र आयाम/विद्युत-क्षेत्र आयाम = प्रकाश की चाल।
D चुंबकीय क्षेत्र धनात्मक y दिशा में है और विद्युत-क्षेत्र आयाम/चुंबकीय-क्षेत्र आयाम = प्रकाश की चाल।
व्याख्या

मुक्त आकाश में चलने वाली समतल विद्युतचुंबकीय तरंग में विद्युत क्षेत्र, चुंबकीय क्षेत्र और संचरण दिशा तीनों परस्पर लंबवत होते हैं। ऊर्जा प्रवाह की दिशा विद्युत क्षेत्र क्रॉस चुंबकीय क्षेत्र से मिलती है, इसलिए धनात्मक x को धनात्मक y से क्रॉस करने पर धनात्मक z दिशा मिलती है। आयाम संबंध विद्युत-क्षेत्र आयाम/चुंबकीय-क्षेत्र आयाम = प्रकाश की चाल है।

प्र.3रैखिक डेल्टा मॉडुलेटर में चरण आकार डेल्टा और नमूना-अंतराल दिया है। किसी इनपुट संकेत के लिए ढाल-अधिभार विकृति को सबसे सीधे कौन-सी स्थिति बताती है?

A इनपुट आयाम हर समय डेल्टा से छोटा हो।
B नमूना आवृत्ति संदेश की उच्चतम आवृत्ति की ठीक दोगुनी हो।
C इनपुट की अधिकतम ढाल डेल्टा/नमूना-अंतराल से अधिक हो जाए।
D क्वांटाइज़र में 256 निर्गत स्तर हों।
व्याख्या

डेल्टा मॉडुलेशन में यह भेजा जाता है कि पुनर्निर्मित सीढ़ीनुमा संकेत निश्चित चरण से ऊपर जाए या नीचे। एक नमूना-अंतराल में वह केवल डेल्टा जितना बदल सकता है, इसलिए अधिकतम अनुसरण-योग्य ढाल डेल्टा/नमूना-अंतराल है। यदि संदेश की ढाल इससे अधिक हो जाती है, तो सीढ़ीनुमा संकेत इनपुट से पीछे रह जाता है और ढाल-अधिभार विकृति आती है। चरण आकार या नमूना-दर बढ़ाने से यह त्रुटि घट सकती है, हालांकि बहुत बड़ा चरण दानेदार शोर बढ़ा देता है।

प्र.4एक लिंक बजट में केबल खंड की इनपुट शक्ति 20 मिलीवाट और आउटपुट शक्ति 2 मिलीवाट है। उसके तुरंत बाद एक एम्प्लिफायर +13 डेसिबल लाभ देता है। बाकी सभी हानियां नजरअंदाज करें, तो दोनों चरणों का कुल प्रभाव क्या होगा?

A -7 डेसिबल शुद्ध हानि, क्योंकि डेसिबल में बदलने से पहले शक्तियों को घटाना चाहिए।
B 0 डेसिबल शुद्ध परिवर्तन, क्योंकि किसी भी क्षीणन की भरपाई केवल मिलीवाट में समान संख्यात्मक एम्प्लिफायर लाभ से हो सकती है।
C +23 डेसिबल शुद्ध लाभ, क्योंकि 20 मिलीवाट से 2 मिलीवाट का शक्ति अनुपात +10 डेसिबल योगदान देता है।
D +3 डेसिबल शुद्ध लाभ, क्योंकि केबल -10 डेसिबल और एम्प्लिफायर +13 डेसिबल योगदान देता है।
व्याख्या

जब आउटपुट शक्ति इनपुट शक्ति से कम हो, तो क्षीणन को ऋणात्मक शक्ति-लाभ की तरह लिखा जाता है। यहां केबल अनुपात 2/20 = 0.1 है, जो 10 लॉग आधार 10 (आउटपुट शक्ति/इनपुट शक्ति) से -10 डेसिबल देता है। श्रेणीक्रम में जुड़े चरणों के डेसिबल मान बीजगणितीय रूप से जुड़ते हैं, इसलिए -10 डेसिबल + 13 डेसिबल = +3 डेसिबल।

प्र.5ऑप्टिकल संचार में तरंगदैर्ध्य विभाजन बहुसंकेतन का सबसे सही वर्णन कौन-सा है?

A अनुरूप तरंगरूप को ऐसी सीढ़ी से दिखाया जाता है जो हर नमूने पर एक चरण बदलती है।
B कई उपयोगकर्ता अलग-अलग समय-खंड लेकर एक ही वाहक साझा करते हैं।
C कई बिट धाराओं को एक ही वाहक पर परस्पर लंबवत फैलाव कूट देकर अलग किया जाता है।
D कई ऑप्टिकल वाहक तरंगदैर्ध्यों को एक ही फाइबर में जोड़ा जाता है और तरंगदैर्ध्य-चयनित युक्तियों से अलग किया जाता है।
व्याख्या

WDM ऑप्टिकल आवृत्तियों पर आवृत्ति-क्षेत्र की बहुसंकेतन तकनीक है। इसमें अलग-अलग डेटा धाराएं अलग-अलग तरंगदैर्ध्यों को मॉडुलेट करती हैं, उन्हें उसी फाइबर में मिलाया जाता है और बाद में ऑप्टिकल तरीके से अलग किया जाता है। इसे समय-खंडों वाले समय विभाजन बहुसंकेतन या फैलाव कूटों वाले CDMA से नहीं मिलाना चाहिए। इसी कारण यह स्रोत-कूटन विधि नहीं, बल्कि उच्च-क्षमता वाली फाइबर तकनीक है।

आपने 44 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं

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और प्रश्न

6सीमित बैंडविड्थ वाले AWGN चैनल की बैंडविड्थ B हर्ट्ज है और प्राप्त संकेत-शोर अनुपात रैखिक अनुपात में दिया है। इस चैनल के लिए शैनन क्षमता का सही निहितार्थ कौन-सा है?

Aसैद्धांतिक रूप से भरोसेमंद बिट दर केवल वाहक आवृत्ति से तय होती है; बैंडविड्थ सिर्फ मॉड्यूलेशन चुनने में मायने रखती है।
Bसैद्धांतिक रूप से भरोसेमंद बिट दर B(S/N) बिट प्रति सेकंड है; क्षमता प्राप्त संकेत शक्ति के साथ रैखिक रूप से बढ़ती है।
Cसैद्धांतिक रूप से भरोसेमंद बिट दर B log2(1 + S/N) बिट प्रति सेकंड है; संकेत-शोर अनुपात बढ़ाने का लाभ लघुगणकीय होता है।
Dसैद्धांतिक रूप से भरोसेमंद बिट दर 2B log2(S/N) बिट प्रति सेकंड है; शून्य SNR पर भी, B शून्य न हो तो सीमित दर मिल सकती है।

7CDMA अपलिंक सेल में बेस स्टेशन के पास वाला मोबाइल, दूर वाले मोबाइल को दबा सकता है यदि दोनों की प्राप्त शक्तियां बहुत अलग हों। इस निकट-दूर दोष को नियंत्रित करने के लिए मुख्यतः कौन-सी व्यवस्था प्रयोग होती है?

Aशैनन बैंडविड्थ को घटाकर शून्य कर देना
Bतेज प्रेषण शक्ति नियंत्रण
CWDM डिमल्टीप्लेक्सर से ऑप्टिकल तरंगदैर्ध्य बदलना
Dस्पीच एन्कोडर में PCM शब्द-लंबाई बढ़ाना

8एक सरल डेल्टा मॉड्युलेटर में सीढ़ीनुमा आउटपुट तेजी से बढ़ते इनपुट का पीछा नहीं कर पा रहा है, जबकि सैंपलिंग दर वही है। कौन-सा डिजाइन बदलाव इस खास त्रुटि को सीधे घटाता है, और धीरे-धीरे बदलने वाले हिस्सों में कौन-सा समझौता खराब हो सकता है?

APCM क्वांटीकरण स्तर बढ़ाएं; इससे एक-बिट फीडबैक लूप हट जाता है
Bस्टेप साइज घटाएं; इससे ढाल अधिभार घटता है, लेकिन एलियासिंग बढ़ सकता है
Cप्रेडिक्टर फीडबैक घटाएं; इससे ग्रैन्युलर शोर घटता है, लेकिन सैंपलिंग खत्म हो जाती है
Dस्टेप साइज बढ़ाएं; इससे ढाल अधिभार घटता है, लेकिन ग्रैन्युलर शोर बढ़ सकता है

9CDMA आधारित संचार प्रणालियों का मुख्य विचार और एक प्रमुख डिजाइन समस्या किस कथन में सबसे ठीक पकड़ी गई है?

Aउपयोगकर्ता अलग-अलग स्प्रेडिंग कोड के सहारे एक ही समय में उसी आवृत्ति बैंड पर संचारित कर सकते हैं, इसलिए शक्ति नियंत्रण महत्वपूर्ण है।
Bउपयोगकर्ताओं को केवल तय समय खंडों से अलग किया जाता है, और सभी कोड जानबूझकर एक जैसे रखे जाते हैं।
Cहर उपयोगकर्ता को स्थायी रूप से अलग संकीर्ण आवृत्ति चैनल दिया जाता है, इसलिए स्प्रेडिंग कोड की जरूरत नहीं रहती।
Dशक्ति नियंत्रण अप्रासंगिक है, क्योंकि कोडों की लंबिकता हर वास्तविक रेडियो चैनल में सारा हस्तक्षेप हटा देती है।

104 किलोहर्ट्ज़ तक बैंड-सीमित वाक् सिग्नल को समान PCM से एन्कोड किया जा रहा है, जिसमें 256 क्वांटीकरण स्तर हैं। नाइक्विस्ट सैंपलिंग दर इस्तेमाल करने पर लाइन कोडिंग या संपीड़न से पहले न्यूनतम कच्ची PCM बिट दर कितनी होगी?

A16 kbps
B64 kbps
C128 kbps
D32 kbps

11डिजिटल संचार कड़ी में कौन-सा दोष सबसे ठीक तरह से ऐसे यादृच्छिक योगात्मक व्यवधान के रूप में मॉडल किया जाता है, जो सीधे सिग्नल-से-शोर अनुपात घटाता है और इसलिए शैनन क्षमता कम करता है, पर ज़रूरी नहीं कि वाहक आवृत्ति को खिसकाए?

Aआदर्श प्रतिबाधा मिलान
Bकेवल सपाट क्षीणन
Cकेवल डॉप्लर विस्थापन
Dयोगात्मक शोर

12एक विद्युतचुंबकीय तरंग मुक्त अंतरिक्ष में लगभग 3 × 10^8 मीटर प्रति सेकंड वेग से चलती है। यदि उसकी आवृत्ति 150 मेगाहर्ट्ज़ है, तो उसका तरंगदैर्ध्य क्या होगा?

A4.5 मीटर
B1.0 मीटर
C2.0 मीटर
D0.5 मीटर

134 किलोहर्ट्ज़ बैंडविड्थ वाला शोररहित निम्न-पास चैनल 16 अलग पहचाने जा सकने वाले संकेत-स्तरों के साथ इस्तेमाल किया जा रहा है। शोररहित चैनल के नाइक्विस्ट बिट-दर व्यंजक के अनुसार अधिकतम बिट दर क्या होगी?

A32 किलोबिट प्रति सेकंड
B64 किलोबिट प्रति सेकंड
C16 किलोबिट प्रति सेकंड
D4 किलोबिट प्रति सेकंड

14एक आदर्श बैंड-सीमित AWGN चैनल की बैंडविड्थ 3 किलोहर्ट्ज़ है और प्राप्त सिग्नल-टू-नॉइज़ अनुपात 30 डेसीबल है। शैनन चैनल क्षमता के सबसे निकट कौन-सा मान होगा?

A9.0 किलोबिट/सेकंड
B15.0 किलोबिट/सेकंड
C29.9 किलोबिट/सेकंड
D90.0 किलोबिट/सेकंड

15किसी रिसीवर का इनपुट स्तर -20 डीबीएम है। इसके बाद सिग्नल 6 डेसीबल फीडर लॉस, 20 डेसीबल लो-नॉइज़ एम्प्लीफायर और 2 डेसीबल कनेक्टर लॉस से गुजरता है। मिसमैच को अनदेखा करें, तो आउटपुट शक्ति-स्तर क्या होगा?

A-8 डीबीएम
B-4 डीबीएम
C-32 डीबीएम
D+8 डीबीएम

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