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स्नातक स्तर की हिंदी भाषा और साहित्य MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए स्नातक स्तर की हिंदी भाषा और साहित्य के 264 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1हिन्दी लेखन में स्वरों की मात्राओं के मानक देवनागरी प्रयोग को कौन-सा नियम सबसे ठीक व्यक्त करता है?

A आश्रित स्वर-चिह्न व्यंजन-चिह्नों से जुड़कर उनके अंतर्निहित स्वर को बदलते हैं।
B हर स्वर केवल पूर्ण स्वतंत्र वर्ण से ही लिखा जाता है।
C स्वर-चिह्नों से बचा जाता है, क्योंकि व्यंजन अकेले ही सभी स्वर-ध्वनियाँ व्यक्त कर देते हैं।
D स्वतंत्र स्वर-वर्ण केवल व्यंजनों के बाद लगाए जाते हैं।
व्याख्या

देवनागरी में व्यंजन-चिह्न सामान्यतः अंतर्निहित स्वर लेकर चलते हैं। उस अंतर्निहित ध्वनि से भिन्न स्वर दिखाने के लिए आश्रित स्वर-चिह्न यानी मात्राएँ व्यंजन से जोड़ी जाती हैं, जबकि स्वतंत्र स्वर-वर्णों का प्रयोग अलग प्रसंगों में होता है।

प्र.2भक्तिकाव्य की कौन-सी धारा अपने प्रतिनिधि कवि के साथ सही मिलाई गई है?

A निर्गुण ज्ञानाश्रयी धारा — कबीर
B निर्गुण ज्ञानाश्रयी धारा — सूरदास
C सगुण राम-भक्ति धारा — मलिक मुहम्मद जायसी
D सगुण कृष्ण-भक्ति धारा — तुलसीदास
व्याख्या

कबीर निर्गुण ज्ञानाश्रयी धारा के प्रमुख कवि हैं। उनकी वाणी निराकार ईश्वर, अंतरंग साधना, कर्मकांड और जाति-आडंबर की आलोचना पर बल देती है। सूरदास कृष्ण-भक्ति, तुलसीदास राम-भक्ति और जायसी सूफी प्रेमाख्यान या प्रेमाश्रयी धारा से संबद्ध माने जाते हैं।

प्र.3स्नातक-स्तर के हिंदी साहित्य-इतिहास उत्तर में भक्तिकालीन काव्य का कौन-सा वर्गीकरण सबसे उपयुक्त माना जाएगा?

A निर्गुण: कृष्ण-भक्ति और राम-भक्ति; सगुण: संत काव्य और प्रेमाख्यान काव्य
B निर्गुण: संत और प्रेमाख्यान परंपराएं; सगुण: कृष्ण-भक्ति और राम-भक्ति परंपराएं
C निर्गुण: रासो और चारण काव्य; सगुण: सिद्ध, नाथ और जैन काव्य
D निर्गुण: रीतिबद्ध और रीतिसिद्ध काव्य; सगुण: रीतिमुक्त और अलंकार काव्य
व्याख्या

भक्तिकाल को पहले निर्गुण और सगुण दो धाराओं में बांटा जाता है। निर्गुण काव्य के साथ संत और प्रेमाख्यान परंपराएं जुड़ी मानी जाती हैं। सगुण काव्य साकार ईश्वर की उपासना पर केंद्रित है, विशेषतः कृष्ण-भक्ति और राम-भक्ति पर; सूरदास और तुलसीदास इसके प्रमुख प्रतिनिधि कवि हैं।

प्र.4परीक्षा-स्तर की पहचान के लिए श्लेष और यमक का सही अंतर कौन-सा विकल्प बताता है?

A श्लेष केवल शब्दालंकार है, जबकि यमक केवल अर्थालंकार है।
B श्लेष में स्पष्ट तुलना-सूचक पद चाहिए, जबकि यमक में वस्तु का निषेध चाहिए।
C श्लेष में एक ही पद या अभिव्यक्ति से एक साथ एक से अधिक अर्थ निकलते हैं; यमक में वही ध्वनि-रूप दोहराकर अलग-अलग अर्थ दिए जाते हैं।
D श्लेष केवल संस्कृत शब्दों में संभव है, जबकि यमक केवल हिंदी शब्दों में संभव है।
व्याख्या

कठिन प्रश्नपत्र में अक्सर अभ्यर्थी से प्रयोगों की संख्या पहचानवाई जाती है। श्लेष में एक शब्द या अभिव्यक्ति अर्थ की कई परतें एक साथ सँभालती है। यमक में समान ध्वनि-रूप की पुनरावृत्ति दिखती है और हर बार अर्थ बदल जाता है। शेष विकल्प असंबद्ध अलंकारों के लक्षण खींच लाते हैं।

प्र.5काव्यशास्त्र में किसी पद्य-पंक्ति में ऐसे कठोर वर्ण-समूह आ जाएँ कि अर्थ समझ में आते हुए भी ध्वनि कान को खटके, तो यह कौन-सा दोष माना जाएगा?

A दुष्क्रमत्व
B ग्राम्यत्व
C अप्रतीतत्व
D श्रुतिकटुत्व
व्याख्या

श्रुतिकटुत्व की पहचान श्रोता के अनुभव से होती है: शब्द कान को कठोर लगते हैं और काव्य की मधुरता में बाधा डालते हैं। यहाँ दोष यह नहीं है कि अर्थ छिप गया है या भाषा ग्राम्य है; निर्णायक संकेत अप्रिय ध्वनि-विन्यास है।

आपने 264 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं

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और प्रश्न

6“रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून; पानी गए न ऊबरे, मोती, मानुष, चून” पंक्ति में “पानी” शब्द कान्ति, प्रतिष्ठा और जल के अर्थों में ग्रहण होता है। यहाँ सबसे ठीक कौन-सा अलंकार है?

Aयमक, क्योंकि केवल ध्वनि की पुनरावृत्ति से अलंकार बन रहा है
Bश्लेष, क्योंकि एक ही शब्द-रूप से प्रसंगानुसार एक से अधिक अर्थ निकलते हैं
Cरूपक, क्योंकि वस्तुओं को सीधे पानी मान लिया गया है
Dविरोधाभास, क्योंकि पानी और सूनेपन का साथ-साथ उल्लेख है

7भक्तिकाव्य में कबीर के स्थान को सबसे ठीक ढंग से कौन-सा कथन बताता है?

Aवे ब्रज में कृष्ण की बाल-लीलाओं के कवि के रूप में मुख्यतः प्रसिद्ध हैं
Bउन्होंने निराकार ईश्वर पर बल दिया और कर्मकांड, जाति-अहंकार तथा बाह्य पूजा की आलोचना की
Cउन्होंने मुख्यतः योद्धा आश्रयदाताओं की वीर वंशावलियाँ लिखीं
Dउन्होंने मुख्यतः नायिका-भेद पर अलंकृत दरबारी काव्य लिखा

8राजस्थान के संदर्भ में राजस्थानी की प्रमुख बोलियों और उनके मुख्य क्षेत्रों का सबसे उपयुक्त मिलान कौन-सा है?

Aढूँढाड़ी - मालवा; मारवाड़ी - मेवाड़; हाड़ौती - जयपुर; मेवाड़ी - हाड़ौती
Bमारवाड़ी - पश्चिमी राजस्थान; मेवाड़ी - उदयपुर-मेवाड़; ढूँढाड़ी - जयपुर-ढूँढाड़; हाड़ौती - कोटा-बूँदी-हाड़ौती
Cमेवाड़ी - बीकानेर-जैसलमेर; ढूँढाड़ी - मेवाड़; मारवाड़ी - हाड़ौती; हाड़ौती - शेखावाटी
Dमारवाड़ी - कोटा-बूँदी; हाड़ौती - जोधपुर-बाड़मेर; मेवाड़ी - जयपुर; ढूँढाड़ी - उदयपुर

9एक यात्री रेत पर चमकती सीपी देखता है और काव्य-वर्णन में उसे चाँदी समझ लेता है। यदि बल संदेह पर नहीं, गलत बोध पर है, तो कौन-सा अलंकार है?

Aविरोधाभास
Bसंदेह
Cभ्रांतिमान
Dउपमा

10किसी प्रश्न में कहा गया है कि गद्यांश व्याकरण की दृष्टि से जुड़ा हुआ है, पर शब्द ऐसे इधर-उधर रखे गए हैं कि अपेक्षित वाक्य-क्रम को मेहनत से फिर बनाना पड़ता है। सबसे निकट का दोष कौन-सा है?

Aअक्रमत्व
Bअप्रतीतत्व
Cग्राम्यत्व
Dश्रुतिकटुत्व

11हिंदी साहित्य के इतिहास में रीतिकालीन काव्य की सबसे प्रमुख विशेषता कौन-सी मानी जाती है?

Aसिद्ध और नाथ योगियों की शब्दावली पर पूर्ण निर्भरता
Bरीति, रस, अलंकार, नायिका-भेद और शृंगार पर व्यवस्थित ध्यान
Cसामंती वीरता पर केंद्रित युद्ध-चरित
Dराजनीतिक पत्रकारिता और राष्ट्रवादी गद्य-सुधार

12बिहारी सतसई को रीतिकाल की चर्चा में सामान्यतः किस विशेषता के कारण उद्धृत किया जाता है?

Aहिंदी साहित्यालोचना का गद्य-इतिहास
Bप्रेमाख्यान परंपरा का सूफी रूपकात्मक प्रेम-आख्यान
Cब्रज भाषा में संक्षिप्त मुक्तक काव्य, जिसमें शृंगार और काव्य-कौशल प्रमुख हैं
Dरामकथा पर आधारित अवधी का लंबा आख्यान

13आरंभिक आधुनिक हिन्दी गद्य-इतिहास से कौन-सा विकल्प पूरी तरह सही कृति-लेखक संबंध देता है?

Aबालकृष्ण भट्ट - कामायनी; जयशंकर प्रसाद - चंद्रकांता संतति; हरिऔध - गोदान
Bदेवकीनंदन खत्री - चंद्रकांता; लाला श्रीनिवास दास - परीक्षा गुरु; राधाकृष्ण दास - निस्सहाय हिन्दू
Cदेवकीनंदन खत्री - गोदान; प्रेमचन्द - चंद्रकांता; श्रीनिवास दास - निस्सहाय हिन्दू
Dमैथिलीशरण गुप्त - नूतन ब्रह्मचारी; नागार्जुन - परीक्षा गुरु; प्रेमचन्द - प्रिय प्रवास

14देवनागरी लेखन के मानक वर्णन में व्यंजनों के संबंध में कौन-सा कथन सबसे अधिक सही है?

Aहर व्यंजन के बाद अलग से लिखा हुआ स्वतंत्र स्वर-वर्ण अनिवार्य रूप से आता है।
Bहर व्यंजन-वर्ण में सामान्यतः अंतर्निहित स्वर होता है, जब तक कोई मात्रा या विराम-चिह्न उसे बदल न दे।
Cदेवनागरी के व्यंजनों का स्वर-लेखन से कोई संबंध नहीं होता।
Dयह लिपि केवल व्यंजन लिखती है और सभी स्वरों को छोड़ देती है।

15निर्धारित छन्दों की सूची में हरिगीतिका की सही पहचान किस लक्षण से होती है?

Aप्रत्येक चरण में 17 वर्णों वाला वर्णिक छन्द, जिसका गण-क्रम म-भ-न-त-त-गुरु-गुरु है।
Bप्रत्येक चरण में 28 मात्राओं वाला मात्रिक छन्द, जिसमें सामान्यतः 16 और 12 मात्राओं पर यति मानी जाती है।
Cऐसा चार-चरणीय छन्द, जिसके विषम चरणों में 11 और सम चरणों में 13 मात्राएँ हों।
Dदोहा और रोला को जोड़कर बना छह पंक्तियों का संयुक्त छन्द।

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