प्रकाशित: 30 जनवरी 2026अर्थव्यवस्था
सरकार ने कोकिंग कोल को भारत के लिए महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज घोषित किया
भारत सरकार ने कोकिंग कोल को महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज घोषित किया। इसकी राजपत्र अधिसूचना 27 जनवरी 2026 की है और इसे 28 जनवरी 2026 को प्रकाशित किया गया। इस्पात क्षेत्र की कोकिंग कोल की लगभग 95% ज़रूरत आयात से पूरी होती है। इससे यह क्षेत्र आपूर्ति बाधित होने और कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाता है। कोकिंग कोल इस्पात उत्पादन के लिए आवश्यक है और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है।
इस दर्जे के बाद कोकिंग कोल निकालने के लिए कोयला ब्लॉकों को प्राथमिकता के आधार पर आवंटित किया जा सकता है, देश में अन्वेषण के लिए कर-प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं, कोकिंग कोल खदानों को पर्यावरण संबंधी मंज़ूरियाँ जल्दी दी जा सकती हैं और भंडारण की व्यवस्था की जा सकती है। भारत का लक्ष्य घरेलू उत्पादन और कोयला धुलाई बढ़ाकर तथा हाइड्रोजन-आधारित प्रत्यक्ष अपचयन जैसी वैकल्पिक इस्पात-निर्माण तकनीकें विकसित करके 2030-31 तक कोकिंग कोल के आयात पर निर्भरता 65% पर लाना है।
0
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजराष्ट्रीयविषयआर्थिकपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनों
यह टॉपिक में दिखता है
Tसेवा क्षेत्र, ऊर्जा एवं परिवहन
Tऔद्योगिक विकास एवं आर्थिक सुधार
Tखनिज
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कोकिंग कोल को खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR अधिनियम) के तहत महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज क्यों घोषित किया गया?
**कोकिंग कोल** को **खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR अधिनियम)** के तहत महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज घोषित किया गया। भारत में लगभग **37.37 अरब टन** भंडार होने के बावजूद इस्पात क्षेत्र की कोकिंग कोल की लगभग **95% ज़रूरत** आयात से पूरी होती है। आयात पर इतनी अधिक निर्भरता से विदेशी मुद्रा का बड़ा बहिर्वाह होता है और आपूर्ति शृंखला बाधित होने का जोखिम बढ़ता है।
भारत में कोकिंग कोल का कितना भंडार है और आयात अब भी इतना अधिक क्यों है?
भारत में कोकिंग कोल का लगभग **37.37 अरब टन** भंडार है। अधिकांश भारतीय कोकिंग कोल अपेक्षाकृत कम गुणवत्ता का है और उसमें राख की मात्रा अधिक होती है। इसलिए मिश्रण किए बिना इसे इस्पात उत्पादन में सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसी कारण इस्पात क्षेत्र की लगभग **95% ज़रूरत** मुख्यतः **ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका** से आयात के ज़रिए पूरी की जाती है।
MMDR अधिनियम के तहत कोकिंग कोल को यह दर्जा दिए जाने का क्या महत्व है?
**MMDR अधिनियम, 1957** के तहत कोकिंग कोल को **महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज** घोषित करने से केंद्र सरकार इसके अन्वेषण को प्राथमिकता दे सकती है, खनन ब्लॉकों की नीलामी में तेज़ी ला सकती है और आवंटन पर रणनीतिक नियंत्रण बनाए रख सकती है। इससे निजी क्षेत्र पर लगी सीमाएँ कम होती हैं और घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है।
कोकिंग कोल का भारत के इस्पात उद्योग से क्या संबंध है?
**कोकिंग कोल** ब्लास्ट फर्नेस से इस्पात बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल है। इसे **कोक** में बदला जाता है, जो इस्पात बनाने की प्रक्रिया में ईंधन और अपचायक, दोनों का काम करता है। भारत एक प्रमुख इस्पात उत्पादक देश है और उसे बड़ी मात्रा में अच्छी गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल की ज़रूरत होती है। फिलहाल यह ज़रूरत लगभग पूरी तरह आयात से पूरी होती है।
MMDR अधिनियम के तहत कोकिंग कोल के साथ अन्य कौन-से खनिज महत्वपूर्ण और रणनीतिक सूची में शामिल हैं?
**MMDR अधिनियम** के तहत भारत की महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज सूची में **लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, टाइटेनियम, दुर्लभ मृदा तत्व** और अब **कोकिंग कोल** शामिल हैं। ये खनिज राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव और औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक हैं, लेकिन इनकी आपूर्ति बाधित होने का जोखिम भारत के सामने है।