30 जनवरी 2026 को सरकार ने कोकिंग कोल को महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज घोषित किया। इस्पात क्षेत्र की कोकिंग कोल की लगभग 95% जरूरत आयात से पूरी होती है। कोकिंग कोल इस्पात उत्पादन के लिए आवश्यक है -- भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है।

रणनीतिक दर्जा मिलने से कोकिंग कोल खनन के लिए कोयला ब्लॉकों का प्राथमिकता आवंटन, घरेलू अन्वेषण के लिए कर प्रोत्साहन और त्वरित पर्यावरण मंजूरी संभव होगी। भारत का लक्ष्य 2030 तक आयात निर्भरता 65% तक कम करना है।