भारत सरकार ने कोकिंग कोल को महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज घोषित किया। इसकी राजपत्र अधिसूचना 27 जनवरी 2026 की है और इसे 28 जनवरी 2026 को प्रकाशित किया गया। इस्पात क्षेत्र की कोकिंग कोल की लगभग 95% ज़रूरत आयात से पूरी होती है। इससे यह क्षेत्र आपूर्ति बाधित होने और कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाता है। कोकिंग कोल इस्पात उत्पादन के लिए आवश्यक है और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है।

इस दर्जे के बाद कोकिंग कोल निकालने के लिए कोयला ब्लॉकों को प्राथमिकता के आधार पर आवंटित किया जा सकता है, देश में अन्वेषण के लिए कर-प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं, कोकिंग कोल खदानों को पर्यावरण संबंधी मंज़ूरियाँ जल्दी दी जा सकती हैं और भंडारण की व्यवस्था की जा सकती है। भारत का लक्ष्य घरेलू उत्पादन और कोयला धुलाई बढ़ाकर तथा हाइड्रोजन-आधारित प्रत्यक्ष अपचयन जैसी वैकल्पिक इस्पात-निर्माण तकनीकें विकसित करके 2030-31 तक कोकिंग कोल के आयात पर निर्भरता 65% पर लाना है।