प्रकाशित: 29 जनवरी 2026अर्थव्यवस्था
सरकार ने कोकिंग कोल को भारत के लिए महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज घोषित किया
30 जनवरी 2026 को सरकार ने कोकिंग कोल को महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज घोषित किया। इस्पात क्षेत्र की कोकिंग कोल की लगभग 95% जरूरत आयात से पूरी होती है। कोकिंग कोल इस्पात उत्पादन के लिए आवश्यक है -- भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है।
रणनीतिक दर्जा मिलने से कोकिंग कोल खनन के लिए कोयला ब्लॉकों का प्राथमिकता आवंटन, घरेलू अन्वेषण के लिए कर प्रोत्साहन और त्वरित पर्यावरण मंजूरी संभव होगी। भारत का लक्ष्य 2030 तक आयात निर्भरता 65% तक कम करना है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कोकिंग कोल को MMDR अधिनियम के तहत महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज क्यों अधिसूचित किया गया?
**कोकिंग कोल** को **MMDR अधिनियम, 1957 के तहत महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज** घोषित किया गया, क्योंकि भारत में लगभग **37.37 अरब टन** भंडार होने के बावजूद इस्पात क्षेत्र की **95% आवश्यकता** आयात से पूरी की जाती है, जिससे भारी **विदेशी मुद्रा का बहिर्वाह** होता है।
भारत के घरेलू कोकिंग कोल भंडार कितने हैं और आयात इतना अधिक क्यों है?
भारत में लगभग **37.37 अरब टन** कोकिंग कोल के भंडार हैं। लेकिन भारतीय कोकिंग कोल की गुणवत्ता कम होती है, यानी उसमें राख की मात्रा अधिक होती है; इसलिए इस्पात उत्पादन में सीधे इस्तेमाल से पहले इसका मिश्रण करना पड़ता है। इसी कारण **95% आवश्यकता** मुख्यतः **ऑस्ट्रेलिया और USA** से आयात के जरिए पूरी की जाती है।
कोकिंग कोल को MMDR अधिनियम के तहत यह दर्जा दिए जाने का क्या महत्व है?
**MMDR (खान और खनिज विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957** के तहत कोकिंग कोल को **महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज** घोषित करने से केंद्र सरकार इसकी खोज को प्राथमिकता दे सकती है, खनन ब्लॉकों की नीलामी तेज कर सकती है और आवंटन पर रणनीतिक नियंत्रण बनाए रख सकती है।
कोकिंग कोल का भारत के इस्पात उद्योग से क्या संबंध है?
**कोकिंग कोल** ब्लास्ट फर्नेस प्रक्रिया से इस्पात उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चा माल है। इसे **कोक** में बदला जाता है, जो इस्पात निर्माण प्रक्रिया में ईंधन और अपचायक अभिकर्मक दोनों का काम करता है। भारत एक प्रमुख इस्पात उत्पादक देश है और उसे बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल की आवश्यकता होती है।
MMDR अधिनियम के तहत कोकिंग कोल के साथ कौन से अन्य खनिज महत्वपूर्ण और रणनीतिक सूची में हैं?
**MMDR अधिनियम** के तहत भारत की महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज सूची में **लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, टाइटेनियम, दुर्लभ पृथ्वी तत्व** और अब **कोकिंग कोल** शामिल हैं। ये वे खनिज हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक हैं।