जुलाई 2025 में दिल्ली में ट्रांसजेंडर संरक्षण नियम 2025 अधिसूचित होने के बाद भारत का ट्रांसजेंडर कल्याण ढाँचा फिर चर्चा में आया। ये ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत बने सबसे व्यापक राज्य स्तरीय नियमों में गिने जाते हैं। राष्ट्रीय ढाँचे में SMILE योजना (2022) शामिल है, जिसमें छात्रवृत्ति, कौशल विकास, आयुष्मान भारत TG Plus स्वास्थ्य बीमा और 20+ राज्यों में गरिमा गृह आते हैं। राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल ऑनलाइन स्व-पहचान प्रमाणपत्र और ID कार्ड जारी करता है। राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद एक वैधानिक निकाय है, जो सरकार को सलाह देती है और शिकायतों का निवारण करती है। प्रमुख कानूनी पड़ाव हैं: NALSA बनाम भारत संघ (2014) — सुप्रीम कोर्ट ने तृतीय लिंग को मान्यता दी; ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम, 2019 — शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य में भेदभाव निषिद्ध किया गया। चुनौतियों में ID दस्तावेजों में लिंग परिवर्तन की जटिल प्रक्रिया, लिंग-पुष्टि देखभाल की अपर्याप्त सुविधाएं और सामाजिक कलंक शामिल हैं। भारत का दृष्टिकोण वैश्विक रुझानों, जैसे अमेरिका में ट्रंप 2.0 युग में बदलाव, से अलग है। राजस्थान में ट्रांसजेंडर आबादी लगभग 17,000–20,000 अनुमानित है और राज्य कल्याण बोर्ड को आजीविका सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गई है।
भारत में ट्रांसजेंडर अधिकार: कानूनी ढाँचा, SMILE योजना और दिल्ली के ट्रांसजेंडर संरक्षण नियम 2025
जुलाई 2025 में, दिल्ली ने ट्रांसजेंडर संरक्षण नियम 2025 अधिसूचित किए, जिसके बाद भारत का ट्रांसजेंडर कल्याण ढाँचा फिर चर्चा में आया — ये ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत सबसे व्यापक राज्य स्तरीय नियमों में से हैं। राष्ट्रीय ढाँचे में ये शामिल हैं: SMILE योजना (2022) — छात्रवृत्ति, कौशल विकास, आयुष्मान भारत TG Plus स्वास्थ्य बीमा और 20+ राज्यों में गरिमा गृह। राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल ऑनलाइन स्व-पहचान प्रमाणपत्र और ID कार्ड जारी करता है। राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद (वैधानिक निकाय) सरकार को सलाह देती है और शिकायतों का निवारण करती है। प्रमुख कानूनी पड़ाव: NALSA बनाम भारत संघ (2014) — सुप्रीम कोर्ट ने तृतीय लिंग को मान्यता दी; ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम, 2019 — शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य में भेदभाव निषिद्ध। चुनौतियाँ: ID दस्तावेजों में लिंग परिवर्तन की जटिल प्रक्रिया, लिंग-पुष्टि संबंधी देखभाल की अपर्याप्त सुविधाएं, सामाजिक कलंक। भारत का दृष्टिकोण दुनिया के कई रुझानों (जैसे अमेरिका में ट्रंप 2.0 युग में बदलाव) से अलग है। राजस्थान में ट्रांसजेंडर आबादी लगभग 17,000–20,000 अनुमानित है और राज्य कल्याण बोर्ड को आजीविका सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गई है।
मुख्य तथ्य
- दिल्ली ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम 2019 के तहत ट्रांसजेंडर संरक्षण नियम 2025 अधिसूचित किए।
- SMILE योजना के तहत 20+ राज्यों में छात्रवृत्ति, कौशल प्रशिक्षण और गरिमा गृह उपलब्ध कराए जाते हैं।
- NALSA बनाम भारत संघ (2014) तृतीय लिंग को मान्यता देने वाला ऐतिहासिक मामला था।
- राष्ट्रीय पोर्टल ऑनलाइन स्व-पहचान प्रमाणपत्र और ID कार्ड जारी करता है।
- वैश्विक बदलावों के उलट, भारत का ढाँचा ट्रांसजेंडर अधिकारों के मामले में प्रगतिशील है।
- राजस्थान की ट्रांसजेंडर आबादी 17,000–20,000 अनुमानित है और राज्य कल्याण बोर्ड अनिवार्य किए गए हैं।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: दिल्ली के ट्रांसजेंडर संरक्षण नियम 2025 और स्माइल योजना की भारत के ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए कानूनी एवं कल्याणकारी ढाँचे को मजबूत करने में महत्ता की चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
दिल्ली के ट्रांसजेंडर संरक्षण नियम 2025 ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम 2019 के तहत राज्य स्तर पर व्यापक कार्यान्वयन का ढाँचा देते हैं, जो तृतीय लिंग मान्यता के ऐतिहासिक नालसा निर्णय के बाद आए। 2022 में शुरू स्माइल योजना बीस राज्यों में छात्रवृत्ति, कौशल विकास, आयुष्मान भारत टीजी प्लस स्वास्थ्य बीमा और गरिमा गृह आश्रय देकर दस्तावेज़ीकरण और स्वास्थ्य सेवा की कमियाँ दूर करती है।
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ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम किस वर्ष अधिनियमित किया गया?
ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 संसद का अधिनियम संख्या 40 है। इसे 5 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली और यह ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा, कल्याण और उनसे जुड़े प्रावधानों से संबंधित है।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
SMILE योजना क्या है और इससे ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को कौन से लाभ मिलते हैं?
SMILE (Support for Marginalised Individuals for Livelihood and Enterprise) 2022 में शुरू की गई एक केंद्रीय योजना है। इसके तहत भारत के 20 से अधिक राज्यों में छात्रवृत्ति, कौशल विकास प्रशिक्षण, आयुष्मान भारत TG Plus स्वास्थ्य बीमा कवरेज और गरिमा गृह आश्रय दिए जाते हैं।
2014 के NALSA बनाम भारत संघ निर्णय का क्या महत्व था?
NALSA बनाम भारत संघ (2014) में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय ने पहली बार तृतीय लिंग को भारत में एक अलग कानूनी श्रेणी के रूप में मान्यता दी। इस निर्णय में सरकार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग के रूप में मानने तथा उन्हें आरक्षण व कल्याण उपाय उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
दिल्ली के ट्रांसजेंडर संरक्षण नियम 2025 के मुख्य प्रावधान क्या हैं?
दिल्ली के ट्रांसजेंडर संरक्षण नियम 2025, जो 20 नवंबर 2025 के आसपास ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत अधिसूचित किए गए, भारत में राज्य स्तर पर बनाए गए सबसे व्यापक कार्यान्वयन नियमों में से हैं। इनमें कल्याण बोर्ड, आश्रय गृह, सेवाओं में गैर-भेदभाव और राज्य स्तर पर अधिकारों के प्रवर्तन की व्यवस्था की गई है।
राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की कैसे मदद करता है?
राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल ऑनलाइन स्व-पहचान प्रमाणपत्र और पहचान पत्र जारी करता है, जिससे ट्रांसजेंडर व्यक्ति किसी भी चिकित्सीय या मनोवैज्ञानिक प्रमाणपत्र के बिना अपनी कानूनी लिंग पहचान स्थापित कर सकते हैं। यह पहले की आवश्यकताओं की तुलना में बड़ा बदलाव है।
राजस्थान में ट्रांसजेंडर जनसंख्या का अनुमान क्या है और राज्य स्तर पर कौन से कल्याण प्रावधान हैं?
राजस्थान की ट्रांसजेंडर जनसंख्या 17,000 से 20,000 के बीच अनुमानित है। ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम, 2019 के तहत राज्य कल्याण बोर्डों का गठन अनिवार्य किया गया है। ये बोर्ड राज्य में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए कल्याण योजनाओं, भेदभाव की रोकथाम और शिकायत निवारण की निगरानी करें।
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