21 नवंबर 2025 के आसपास, भारत के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने अपनी 175वीं वर्षगांठ मनाई। 1851 में ब्रिटिश प्रशासन के तहत मुख्यतः भाप इंजनों के लिए कोयला भंडार खोजने के उद्देश्य से स्थापित GSI अब भूवैज्ञानिक मानचित्रण, खनिज अन्वेषण, भूकंप विज्ञान, हिमनद विज्ञान, समुद्री भूविज्ञान और प्राकृतिक आपदा मूल्यांकन करने वाला व्यापक भूविज्ञान संगठन बन गया है। प्रमुख हालिया उपलब्धियां हैं: राष्ट्रीय भूविज्ञान डेटा भंडार (NGDR) का डिजिटीकरण; भारत के ऊर्जा संक्रमण के लिए महत्वपूर्ण खनिजों का सर्वेक्षण (लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, REEs); और हिंद महासागर में समुद्री तल के खनिजों का मानचित्रण। राजस्थान में GSI ने प्रमुख खनिज भंडारों की पहचान की है — जावर और सिंदेसर कलां में विश्व-स्तरीय जस्ता-सीसा भंडार, खेतड़ी में तांबा, नागौर-गंगानगर बेसिन में पोटाश, जैसलमेर में रॉक फॉस्फेट, और बाड़मेर में लिग्नाइट। देश के कुल खनिज उत्पादन में राजस्थान का हिस्सा लगभग 9% है।
भारत के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के 175 वर्ष पूरे: खनिज मानचित्रण और भूविज्ञान सेवाओं में महत्वपूर्ण उपलब्धि
21 नवंबर 2025 के आसपास, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने अपनी 175वीं वर्षगांठ मनाई। 1851 में ब्रिटिश प्रशासन के तहत मुख्य रूप से भाप इंजनों के लिए कोयला भंडार खोजने के उद्देश्य से स्थापित GSI अब भूवैज्ञानिक मानचित्रण, खनिज अन्वेषण, भूकंप विज्ञान, हिमनद विज्ञान, समुद्री भूविज्ञान और प्राकृतिक आपदा मूल्यांकन से जुड़ा व्यापक भूविज्ञान संगठन बन चुका है। हाल की प्रमुख उपलब्धियां हैं: राष्ट्रीय भूविज्ञान डेटा भंडार (NGDR) का डिजिटीकरण; भारत के ऊर्जा संक्रमण के लिए महत्वपूर्ण खनिजों का सर्वेक्षण (लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, REEs); और हिंद महासागर में समुद्री तल के खनिजों का मानचित्रण। राजस्थान में GSI ने प्रमुख खनिज भंडारों की पहचान की है — जावर और सिंदेसर कलां में विश्व-स्तरीय जस्ता-सीसा भंडार, खेतड़ी में तांबा, नागौर-गंगानगर बेसिन में पोटाश, जैसलमेर में रॉक फॉस्फेट, और बाड़मेर में लिग्नाइट। राजस्थान देश के कुल खनिज उत्पादन में लगभग 9% हिस्सेदारी रखता है।
मुख्य तथ्य
- GSI ने भूवैज्ञानिक सेवा के 175 वर्ष पूरे किए; इसकी स्थापना 1851 में कोयला अन्वेषण के लिए हुई थी।
- अब यह भूवैज्ञानिक मानचित्रण, खनिज अन्वेषण, भूकंप विज्ञान और समुद्री भूविज्ञान करता है।
- GSI ने राजस्थान में प्रमुख भंडार पहचाने: जावर में जस्ता-सीसा, खेतड़ी में तांबा, बाड़मेर में लिग्नाइट।
- NGDR का डिजिटीकरण और लिथियम व REEs के लिए महत्वपूर्ण खनिज सर्वेक्षण हाल की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं।
- राजस्थान मूल्य के आधार पर भारत के कुल खनिज उत्पादन का लगभग 20–25% योगदान देता है।
- PM मोदी की महत्वपूर्ण खनिज सर्कुलैरिटी पहल में खनिज खोज के लिए GSI की भूमिका महत्वपूर्ण है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: जीएसआई की 175 वर्षीय विरासत राजस्थान की खनिज अर्थव्यवस्था और भारत के खनिज मिशन के लिए कैसे प्रासंगिक है?
उत्तर (50 शब्द):
1851 में स्थापित जीएसआई ने नवंबर 2025 में 175 वर्ष पूरे किए। अरावली-दिल्ली वलित पट्टी मानचित्रण से ज़ावर में विश्वस्तरीय जस्ता-सीसा निक्षेप, खेतड़ी में तांबा और नागौर-गंगानगर बेसिन में पोटाश पहचाना गया। लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्वों के हालिया सर्वेक्षण भारत की ऊर्जा-संक्रमण रणनीति में सहायक हैं।
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भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की स्थापना किस वर्ष में हुई थी?
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की स्थापना 1851 में हुई थी। इसका शुरुआती उद्देश्य कोयला और अन्य खनिज संसाधनों की खोज और आकलन करना था; बाद में यह भारत की प्रमुख भू-विज्ञान सर्वेक्षण संस्था बनी।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की स्थापना कब और किस उद्देश्य से हुई थी?
GSI की स्थापना 1851 में ब्रिटिश प्रशासन के अंतर्गत मुख्यतः भारतीय रेलवे के भाप इंजनों के लिए कोयला भंडार खोजने के उद्देश्य से हुई थी। 175 वर्षों में यह भूवैज्ञानिक मानचित्रण, खनिज अन्वेषण, भूकंप विज्ञान, हिमनद विज्ञान, समुद्री भूविज्ञान और प्राकृतिक आपदा मूल्यांकन करने वाला व्यापक भूविज्ञान संगठन बन गया।
राष्ट्रीय भूविज्ञान डेटा भंडार (NGDR) क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
NGDR GSI का डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जो दशकों के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण डेटा, फील्ड रिकॉर्ड और खनिज मानचित्रों को डिजिटल रूप में एक जगह लाता है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे शोधकर्ताओं, उद्योगों और नीति-निर्माताओं को भूवैज्ञानिक डेटा तक आसान पहुंच मिलती है और भारत की महत्वपूर्ण खनिज रणनीति के तहत खनिज अन्वेषण तेज होता है।
GSI ने राजस्थान में कौन-से प्रमुख खनिज भंडार चिह्नित किए, और भारत के खनिज उत्पादन में राजस्थान की कितनी हिस्सेदारी है?
GSI ने राजस्थान में जावर (उदयपुर) में जस्ता-सीसा, खेतड़ी (झुंझुनू) में तांबा और बाड़मेर में लिग्नाइट के प्रमुख भंडार चिह्नित किए। कुल खनिज उत्पादन के मूल्य के आधार पर राजस्थान भारत में लगभग 20–25% का योगदान देता है, जिससे यह देश के सबसे खनिज-समृद्ध राज्यों में से एक है।
महत्वपूर्ण खनिज क्या होते हैं और भारत के ऊर्जा संक्रमण में GSI की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
महत्वपूर्ण खनिज वे तत्व हैं जो स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों, जैसे EV बैटरी, सौर पैनल और पवन टर्बाइन, के लिए आवश्यक होते हैं। इनमें लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और दुर्लभ मृदा तत्व (REEs) शामिल हैं। GSI की खोज और सर्वेक्षण से जुड़ी भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अधिकांश महत्वपूर्ण खनिज के लिए आयात पर निर्भर है और PM मोदी की महत्वपूर्ण खनिज सर्कुलैरिटी पहल के तहत घरेलू सर्वेक्षण इस निर्भरता को कम कर सकते हैं।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) किस मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है?
GSI भारत सरकार के खान मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। यह देश का प्रमुख भूवैज्ञानिक संगठन है और खनिज संसाधन मूल्यांकन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा बुनियादी ढाँचा विकास के लिए आधारभूत भूविज्ञान डेटा प्रदान करता है।
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