राजस्थान विधानसभा ने सितम्बर 2025 में राजस्थान धर्मांतरण निषेध विधेयक 2025 पारित किया। यह जबरन, प्रलोभन, विवाह, मिथ्या-प्रचार एवं ऑनलाइन माध्यम से धर्म-परिवर्तन को निषिद्ध करता है। सामान्य मामलों में 7–14 वर्ष, महिलाओं/नाबालिगों/अनुसूचित जाति-जनजाति के मामलों में 10–20 वर्ष तथा सामूहिक धर्मांतरण में आजीवन कारावास का प्रावधान है। स्वैच्छिक धर्मांतरण के लिए व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को कम से कम 90 दिन पूर्व घोषणा देनी होगी, जबकि धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति/धार्मिक पुरोहित को 2 माह पूर्व सूचना देनी होगी। आलोचकों का तर्क है कि यह अंतर-धार्मिक विवाहों को अपराध के दायरे में ला देता है तथा अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) एवं अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है।
राजस्थान विधानसभा ने धर्मांतरण निषेध विधेयक 2025 पारित किया
राजस्थान विधानसभा ने सितम्बर 2025 में राजस्थान धर्मांतरण निषेध विधेयक 2025 पारित किया। यह जबरन, प्रलोभन, विवाह, मिथ्या-प्रचार एवं ऑनलाइन माध्यम से धर्म-परिवर्तन को निषिद्ध करता है। सामान्य मामलों में 7–14 वर्ष, महिलाओं/नाबालिगों/अनुसूचित जाति-जनजाति के मामलों में 10–20 वर्ष तथा सामूहिक धर्मांतरण में आजीवन कारावास का प्रावधान है। स्वैच्छिक धर्मांतरण के लिए व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को कम से कम 90 दिन पूर्व घोषणा देनी होगी, जबकि धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति/धार्मिक पुरोहित को 2 माह पूर्व सूचना देनी होगी। आलोचकों का तर्क है कि यह अंतर-धार्मिक विवाहों को आपराधिक बनाता है तथा अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) एवं अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान विधानसभा ने धर्मांतरण निषेध विधेयक 2025 पारित किया।
- विधेयक जबरन, प्रलोभन, विवाह और ऑनलाइन तरीकों से धर्मांतरण पर रोक लगाता है।
- सामान्य मामलों में 7-14 वर्ष कारावास का प्रावधान है।
- महिलाओं, नाबालिगों या SC/ST से जुड़े मामलों में 10-20 वर्ष कारावास है।
- सामूहिक धर्मांतरण पर नए कानून में आजीवन कारावास का प्रावधान है।
- कानून में सबूत का बोझ धर्मांतरण के आरोपी पर डाला गया है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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राजस्थान गैरकानूनी धर्म-परिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025 के तहत सामूहिक धर्मांतरण पर अधिकतम दंड क्या है?
विधेयक सामूहिक धर्मांतरण के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान करता है और सामूहिक धर्मांतरण में प्रयुक्त संपत्तियों को जब्त करने की अनुमति देता है। सामान्य दंड 7 से 14 वर्ष तक, और महिलाओं, नाबालिगों या अनुसूचित जाति/जनजाति को लक्षित करने पर 10 से 20 वर्ष तक होता है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान धर्मांतरण निषेध विधेयक 2025 धर्म-परिवर्तन के किन तरीकों पर रोक लगाता है?
यह विधेयक जबरन, बलपूर्वक, प्रलोभन (उपहार, धन या भौतिक लाभ से), विवाह, मिथ्या-प्रचार और ऑनलाइन माध्यम से किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाता है। इस तरह के सभी धर्मांतरण गैरकानूनी और दंडनीय घोषित किए गए हैं।
राजस्थान धर्मांतरण निषेध विधेयक 2025 में क्या दंड निर्धारित हैं?
सामान्य मामलों में 7 से 14 वर्ष कारावास का प्रावधान है। महिलाओं, नाबालिगों या अनुसूचित जाति या जनजाति के सदस्यों से जुड़े मामलों में 10 से 20 वर्ष कारावास है। सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास का प्रावधान है और सामूहिक धर्मांतरण के लिए इस्तेमाल की गई संपत्ति जब्त की जा सकती है।
नए राजस्थान कानून के तहत स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को क्या करना होगा?
राजस्थान धर्मांतरण निषेध विधेयक 2025 के तहत स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने के इच्छुक व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को कम से कम 90 दिन पहले घोषणा देनी होगी। धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति और समारोह संपन्न कराने वाले धार्मिक पुरोहित को 2 माह पहले सूचना देनी होगी।
राजस्थान धर्मांतरण विधेयक में सबूत का बोझ किस पर रखा गया है?
राजस्थान धर्मांतरण निषेध विधेयक 2025 में सबूत का बोझ आरोपी पर डाला गया है, यानी धर्मांतरण कराने या उसमें सहायता करने के आरोपी को स्वयं साबित करना होगा कि यह स्वैच्छिक और कानूनी था। सबूत के बोझ की इस व्यवस्था पर कानूनी बहस जारी है।
आलोचकों ने राजस्थान धर्मांतरण विधेयक के बारे में कौन सी संवैधानिक चिंताएँ उठाई हैं?
आलोचकों का तर्क है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन कर सकता है। अंतर-धार्मिक विवाहों को अपराध के दायरे में लाने की इसकी संभावना को लेकर भी चिंताएँ जताई गई हैं।
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