11 नवंबर 2025 को छह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 8 विधानसभा उपचुनावों के लिए मतदान हुआ, जिसमें राजस्थान के बारां जिले की अंता विधानसभा सीट (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 193) शामिल थी। अंता में मतदान 79.32% रहा और 2,27,563 पंजीकृत मतदाताओं के लिए 268 मतदान केंद्र स्थापित किए गए। 14 नवंबर को घोषित परिणामों में कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद जैन 'भाया' ने 69,571 मतों से अंता उपचुनाव जीता और भाजपा उम्मीदवार मोरपाल सुमन (53,959 मत) को लगभग 15,612 मतों के अंतर से हराया। 2005 के एक मामले में दोषसिद्धि के बाद पूर्व भाजपा विधायक कँवर लाल मीणा की सदस्यता रद्द होने से अंता उपचुनाव कराना आवश्यक हुआ था। कांग्रेस की यह जीत राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दिसंबर 2023 से भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा-शासित राजस्थान सरकार के सामने विपक्ष को मजबूती मिली है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने जम्मू-कश्मीर, झारखंड, तेलंगाना, पंजाब, मिजोरम, ओडिशा और राजस्थान में एक साथ उपचुनाव कराए।
अंता (राजस्थान) उपचुनाव 2025: मतदान सम्पन्न — कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद जैन 'भाया' ने 69,571 मतों से जीत दर्ज की
11 नवंबर 2025 को छह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 8 विधानसभा उपचुनावों के लिए मतदान हुआ, जिसमें राजस्थान के बारां जिले की अंता विधानसभा सीट (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 193) शामिल थी। अंता में मतदान 79.32% रहा और 2,27,563 पंजीकृत मतदाताओं के लिए 268 मतदान केंद्र बनाए गए। 14 नवंबर को घोषित परिणामों में कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद जैन 'भाया' ने 69,571 मत हासिल कर अंता उपचुनाव जीता और भाजपा उम्मीदवार मोरपाल सुमन (53,959 मत) को लगभग 15,612 मतों के अंतर से हराया। 2005 के एक मामले में दोषसिद्धि के बाद पूर्व भाजपा विधायक कँवर लाल मीणा की सदस्यता रद्द होने से अंता उपचुनाव आवश्यक हुआ था। कांग्रेस की यह जीत राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दिसंबर 2023 से राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार है और इस नतीजे से विपक्ष को मजबूती मिलती है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने जम्मू-कश्मीर, झारखंड, तेलंगाना, पंजाब, मिजोरम, ओडिशा और राजस्थान में एक साथ उपचुनाव कराए।
मुख्य तथ्य
- अंता (राजस्थान) विधानसभा उपचुनाव 11 नवंबर 2025 को 79.32% मतदान के साथ सम्पन्न हुआ।
- कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद जैन 'भाया' ने 69,571 मत पाकर भाजपा के 53,959 मतों के मुकाबले जीत दर्ज की।
- भाजपा शासित राजस्थान में कांग्रेस ने लगभग 15,612 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
- छह राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में एक साथ हुए 8 उपचुनावों में से एक।
- 2005 के मामले में भाजपा विधायक कंवर लाल मीणा की दोषसिद्धि से सीट खाली हुई थी।
- अंता निर्वाचन क्षेत्र के 268 मतदान केंद्रों पर 2,27,563 पंजीकृत मतदाताओं ने मतदान किया।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: राजस्थान के बारां जिले में अंता उपचुनाव परिणाम का राजनीतिक महत्व क्या है?
उत्तर (50 शब्द):
11 नवंबर 2025 को 268 मतदान केंद्रों पर 79.32 प्रतिशत मतदान हुआ। कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया ने 69,571 मतों से जीतकर भाजपा के मोरपाल सुमन को 15,612 मतों से हराया। पूर्व विधायक की सजा से उपचुनाव हुआ जिसने भाजपा शासित राजस्थान में विपक्ष का मनोबल बढ़ाया।
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स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अंता विधानसभा उपचुनाव कब हुआ और मतदान प्रतिशत क्या रहा?
अंता विधानसभा उपचुनाव 11 नवंबर 2025 को हुआ। राजस्थान के बारां जिले में अंता निर्वाचन क्षेत्र (क्षेत्र संख्या 193) में 268 मतदान केंद्रों पर 2,27,563 पंजीकृत मतदाताओं में से 79.32% ने मतदान किया।
अंता उपचुनाव 2025 में कौन जीता और किस अंतर से?
कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद जैन 'भाया' ने 69,571 मतों से जीत दर्ज की, जबकि भाजपा उम्मीदवार मोरपाल सुमन को 53,959 मत मिले। जीत का अंतर लगभग 15,612 मत रहा, जो भाजपा-शासित राजस्थान में कांग्रेस की निर्णायक जीत मानी जाती है।
अंता विधानसभा सीट खाली क्यों हुई जिससे उपचुनाव की जरूरत पड़ी?
अंता सीट इसलिए खाली हुई क्योंकि मौजूदा भाजपा विधायक कंवर लाल मीणा को 2005 के हमले के मामले में दोषी ठहराया गया। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत आपराधिक दोषसिद्धि होने पर विधायक की सीट चली जाती है, इसलिए उपचुनाव अनिवार्य हो गया।
अंता उपचुनाव में कांग्रेस की जीत का क्या राजनीतिक महत्व है?
भाजपा-शासित राजस्थान में 15,000 से अधिक मतों के अंतर से अंता जीतना कांग्रेस के लिए राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह 2023 विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद राजस्थान के कुछ हिस्सों में कांग्रेस के प्रति जारी समर्थन को दर्शाता है। यह छह राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में एक साथ हुए 8 उपचुनावों का हिस्सा था।
किस कानूनी प्रावधान के तहत दोषसिद्ध विधायक अपनी सीट खोता है और यह अंता मामले में कैसे लागू हुआ?
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के अनुसार, किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्ध और दो वर्ष या उससे अधिक कारावास की सजा पाए व्यक्ति को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाता है और उसकी मौजूदा विधायी सीट चली जाती है। 2005 के हमले के मामले में भाजपा विधायक कंवर लाल मीणा की दोषसिद्धि के कारण यही हुआ, जिससे अंता सीट खाली हुई और उपचुनाव जरूरी हो गया।
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