भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने दिसंबर 2025 के अंत में तरलता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण पैकेज की घोषणा की, जिसमें ₹2 लाख करोड़ के ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) खरीद नीलामी और 3-वर्षीय अवधि के $10 अरब के USD/INR बाय-सेल विदेशी मुद्रा स्वैप शामिल हैं। OMO खरीद ₹50,000 करोड़ की चार किश्तों में की जाएगी। USD/INR स्वैप से रुपया तरलता की कमी और विनिमय दर प्रबंधन, दोनों चुनौतियों से एक साथ निपटा जाता है — RBI बैंकों से डॉलर खरीदता है (रुपया डालता है) और तीन वर्षों बाद उन्हें वापस बेचने की प्रतिबद्धता लेता है। यह कदम बैंकिंग प्रणाली में प्रणालीगत तरलता घाटे की पृष्ठभूमि में उठाया गया, जो अग्रिम कर बहिर्वाह, GST भुगतान और कड़ी विदेशी मुद्रा स्थितियों के कारण बना रहा। यह घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले और फरवरी 2026 में प्रत्याशित मौद्रिक नीति समीक्षा से पूर्व एक सक्रिय तरलता प्रबंधन उपाय के रूप में देखी गई।