25 नवंबर 2025 की समसामयिकी में नालसा से जुड़ा प्रमुख अपडेट यह है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण का नया कार्यकारी अध्यक्ष नामित किया गया। वे न्यायमूर्ति सूर्य कांत का स्थान लेंगे। परीक्षा की दृष्टि से यह केवल एक नियुक्ति नहीं है, बल्कि न्याय तक पहुंच, विधिक सहायता और लोक अदालतों से जुड़ी संस्था को याद रखने का संकेत भी है।
नालसा, विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत बनी संस्था है। इसका मूल काम समाज के कमजोर वर्गों को मुफ्त विधिक सेवाएं उपलब्ध कराना और विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटारे के लिए लोक अदालतों का आयोजन करना है। इसलिए यह टॉपिक राजव्यवस्था और शासन दोनों से जुड़ता है। प्रीलिम्स में सीधे तथ्य पूछे जा सकते हैं, जैसे कार्यकारी अध्यक्ष कौन हैं, नालसा किस अधिनियम के तहत बना है, और लोक अदालतों का संबंध किस संस्था से है। नियुक्ति से जुड़ा तथ्य याद रखते समय संस्था का अधिनियम, उसका सामाजिक उद्देश्य और लोक अदालत वाला काम साथ में जोड़ना बेहतर रहेगा।
मुख्य परीक्षा में यह टॉपिक न्याय तक पहुंच, कमजोर वर्गों के विधिक सशक्तिकरण, विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटारे और संस्थागत विधिक सहायता जैसे पहलुओं से उपयोगी है। राज्य स्तर पर भी विधिक सेवा प्राधिकरण नालसा की नीतियों और निर्देशों को लागू करते हैं तथा लोगों को मुफ्त विधिक सेवाएं और लोक अदालत की व्यवस्था उपलब्ध कराते हैं। इसलिए RAS/UPSC अभ्यर्थियों के लिए नालसा को केवल मौजूदा नियुक्ति के रूप में नहीं, बल्कि स्टैटिक जीके और शासन से जुड़ाव के साथ पढ़ना चाहिए।
