मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 23 नवंबर 2025 को राजस्थान में राज्य स्तरीय पल्स पोलियो अभियान का उद्घाटन किया। यह अभियान पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पोलियो से बचाने के लिए ओरल पोलियो वैक्सीन की खुराक देने पर केंद्रित है। राज्य में टीकाकरण बूथों के साथ घर-घर जाने वाली टीमों को भी लगाया गया, ताकि बूथ पर न पहुंच पाए बच्चों तक भी वैक्सीन पहुंच सके।

राजस्थान के संदर्भ में यह खबर स्वास्थ्य प्रशासन और जन-स्वास्थ्य प्रबंधन का सीधा उदाहरण है। अभियान का लक्ष्य पांच वर्ष तक के 1.08 करोड़ से अधिक बच्चों को कवर करना था। इसके लिए 58,823 पोलियो बूथ बनाए गए और 6,741 ट्रांजिट टीमों तथा 8,989 मोबाइल टीमों की तैनाती की गई। बूथों के बाद अगले दो दिनों तक घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को खुराक देने की व्यवस्था भी रखी गई। परीक्षा की दृष्टि से यह तथ्य महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे अभियान में लक्षित आयु-वर्ग, वैक्सीन का प्रकार, कवरेज तंत्र और राज्य सरकार की भूमिका सीधे पूछे जा सकते हैं।

स्टैटिक जीके से जोड़कर देखें तो पोलियो एक ऐसी बीमारी है जो मुख्य रूप से पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। WHO के अनुसार 200 संक्रमणों में से 1 संक्रमण स्थायी लकवे का कारण बन सकता है। भारत में पल्स पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम 2 अक्टूबर 1994 को शुरू हुआ था और भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के साथ 27 मार्च 2014 को पोलियो-मुक्त प्रमाणन मिला। इसलिए राजस्थान का यह अभियान केवल एक राज्य-स्तरीय घटना नहीं, बल्कि भारत की पोलियो-मुक्त स्थिति बनाए रखने की सतत जन-स्वास्थ्य रणनीति का हिस्सा है। RAS और UPSC में इसे राजस्थान समसामयिकी, स्वास्थ्य प्रशासन, बाल स्वास्थ्य और टीकाकरण कार्यक्रमों से जोड़ा जा सकता है।