प्रकाशित: 14 सितंबर 2025DD Newsटॉपिक
माही-बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र: PM मोदी ने आधारशिला रखी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2025 को राजस्थान में माही-बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की आधारशिला रखी। यह परियोजना बांसवाड़ा, राजस्थान में 1.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के पैकेज का हिस्सा है। संयंत्र 1,366 एकड़ क्षेत्र में बनेगा और इसकी कुल स्थापित क्षमता 2,800 मेगावाट होगी। इसमें चार स्वदेशी 700 मेगावाट विद्युत क्षमता वाले दाबित भारी जल रिएक्टर लगाए जाने हैं। परियोजना की कुल लागत 42,000 करोड़ रुपये बताई गई है। पहली इकाई 2031 में चालू होने और बाकी इकाइयाँ छह-छह महीने के अंतराल पर शुरू होने की सूचना है।
परीक्षा की दृष्टि से यह विषय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, राजस्थान की अर्थव्यवस्था, अवसंरचना और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ता है। दाबित भारी जल रिएक्टर में भारी पानी, यानी ड्यूटेरियम ऑक्साइड, मॉडरेटर और शीतलक दोनों के रूप में काम करता है। ऐसा रिएक्टर प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर सकता है, इसलिए यह परमाणु ऊर्जा में घरेलू क्षमता और आत्मनिर्भरता से भी जुड़ता है, जिस पर प्रश्न पूछा जा सकता है। राजस्थान के संदर्भ में रावतभाटा, कोटा के पास स्थित राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन पहले से महत्वपूर्ण है; माही-बांसवाड़ा संयंत्र को राज्य के दूसरे परमाणु ऊर्जा स्टेशन के रूप में देखा जा रहा है।
RAS और UPSC तैयारी में इस घटना से सीधे तथ्यात्मक प्रश्न भी बन सकते हैं और मुख्य परीक्षा में स्वच्छ बिजली, बेसलोड ऊर्जा, क्षेत्रीय विकास तथा बड़े अवसंरचना निवेश पर संक्षिप्त टिप्पणी भी पूछी जा सकती है। याद रखने योग्य बिंदु हैं: स्थान राजस्थान, क्षमता 2,800 मेगावाट, भूमि 1,366 एकड़, चार स्वदेशी 700 मेगावाट विद्युत क्षमता वाले दाबित भारी जल रिएक्टर, लागत 42,000 करोड़ रुपये और पहली इकाई 2031 में प्रस्तावित।
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6-अक्ष वर्गीकरण
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राजस्थान में माही-बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की नियोजित कुल स्थापित क्षमता क्या है?
व्याख्या · सही उत्तर Cलेख के अनुसार माही-बांसवाड़ा संयंत्र 1,366 एकड़ पर बनाया जाएगा जिसकी स्थापित क्षमता 2,800 मेगावाट होगी, और इसमें चार स्वदेशी 700 मेगावाट दाब भारी जल रिएक्टर शामिल होंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
माही-बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
यह संयंत्र राजस्थान में 1,366 एकड़ भूमि पर बनेगा। इसकी स्थापित क्षमता 2,800 मेगावाट होगी और इसमें चार स्वदेशी 700 मेगावाट विद्युत क्षमता वाले दाबित भारी जल रिएक्टर होंगे। कुल लागत 42,000 करोड़ रुपये है। पहली इकाई 2031 में और बाकी इकाइयाँ छह-छह महीने के अंतराल पर चालू होने की सूचना है।
दाबित भारी जल रिएक्टर क्यों महत्वपूर्ण है?
दाबित भारी जल रिएक्टर में भारी पानी, यानी ड्यूटेरियम ऑक्साइड, मॉडरेटर और शीतलक दोनों के रूप में काम करता है। यह प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर सकता है, इसलिए यह परमाणु ऊर्जा में घरेलू क्षमता और आत्मनिर्भरता से जुड़ा परीक्षा-उपयोगी तथ्य है।
राजस्थान की ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस परियोजना का महत्व क्या है?
माही-बांसवाड़ा संयंत्र राजस्थान के ऊर्जा मिश्रण में 2,800 मेगावाट परमाणु बिजली जोड़ने के लिए प्रस्तावित है। यह बड़े अवसंरचना निवेश, क्षेत्रीय विकास और स्वच्छ बेसलोड बिजली के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
राजस्थान में पहले से कौन-सा परमाणु ऊर्जा स्टेशन महत्वपूर्ण है?
कोटा के पास रावतभाटा स्थित राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन राज्य का मौजूदा परमाणु ऊर्जा केंद्र है। माही-बांसवाड़ा संयंत्र को राजस्थान के दूसरे परमाणु ऊर्जा स्टेशन के रूप में देखा जा रहा है।
RAS और UPSC तैयारी में इस खबर से क्या पूछा जा सकता है?
परीक्षा में स्थान, क्षमता, भूमि क्षेत्र, रिएक्टरों की संख्या, लागत और 2031 में पहली इकाई शुरू होने जैसे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ बिजली और राजस्थान के क्षेत्रीय विकास से इसके संबंध पर प्रश्न पूछा जा सकता है।