प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2025 को राजस्थान में माही-बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की आधारशिला रखी। यह परियोजना बांसवाड़ा, राजस्थान में 1.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के पैकेज का हिस्सा है। संयंत्र 1,366 एकड़ क्षेत्र में बनेगा और इसकी कुल स्थापित क्षमता 2,800 मेगावाट होगी। इसमें चार स्वदेशी 700 मेगावाट विद्युत क्षमता वाले दाबित भारी जल रिएक्टर लगाए जाने हैं। परियोजना की कुल लागत 42,000 करोड़ रुपये बताई गई है। पहली इकाई 2031 में चालू होने और बाकी इकाइयाँ छह-छह महीने के अंतराल पर शुरू होने की सूचना है।

परीक्षा की दृष्टि से यह विषय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, राजस्थान की अर्थव्यवस्था, अवसंरचना और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ता है। दाबित भारी जल रिएक्टर में भारी पानी, यानी ड्यूटेरियम ऑक्साइड, मॉडरेटर और शीतलक दोनों के रूप में काम करता है। ऐसा रिएक्टर प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर सकता है, इसलिए यह परमाणु ऊर्जा में घरेलू क्षमता और आत्मनिर्भरता से भी जुड़ता है, जिस पर प्रश्न पूछा जा सकता है। राजस्थान के संदर्भ में रावतभाटा, कोटा के पास स्थित राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन पहले से महत्वपूर्ण है; माही-बांसवाड़ा संयंत्र को राज्य के दूसरे परमाणु ऊर्जा स्टेशन के रूप में देखा जा रहा है।

RAS और UPSC तैयारी में इस घटना से सीधे तथ्यात्मक प्रश्न भी बन सकते हैं और मुख्य परीक्षा में स्वच्छ बिजली, बेसलोड ऊर्जा, क्षेत्रीय विकास तथा बड़े अवसंरचना निवेश पर संक्षिप्त टिप्पणी भी पूछी जा सकती है। याद रखने योग्य बिंदु हैं: स्थान राजस्थान, क्षमता 2,800 मेगावाट, भूमि 1,366 एकड़, चार स्वदेशी 700 मेगावाट विद्युत क्षमता वाले दाबित भारी जल रिएक्टर, लागत 42,000 करोड़ रुपये और पहली इकाई 2031 में प्रस्तावित।