10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने और पुनर्गठित करने की मंजूरी दी। कुल परिव्यय 8.69 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है। पुनर्गठित जल जीवन मिशन 2.0 में सुजलम भारत नामक राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा है, जिसके तहत हर गांव को स्रोत से नल तक पेयजल आपूर्ति का मानचित्रण करने के लिए विशिष्ट सुजल गांव या सेवा क्षेत्र पहचान दी जाती है। इसका लक्ष्य दिसंबर 2028 तक सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देना है। 17 मार्च 2026 को राजस्थान और मध्य प्रदेश ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सुधारों से जुड़े समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। राजस्थान का समझौता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और राज्य मंत्री वी. सोमण्णा की उपस्थिति में हुआ। समझौते में संरचनात्मक सुधार के 11 क्षेत्र हैं और पूर्ण पाइप जलापूर्ति योजनाओं को जल अर्पण प्रक्रिया से सौंपने का प्रावधान है। मंत्रिमंडल नोट में 9 करोड़ महिलाओं को पानी लाने के श्रम से मुक्ति, प्रतिवर्ष 1.36 लाख कम उम्र के बच्चों की संभावित जीवन-रक्षा और 2.2 करोड़ अप्रत्यक्ष व्यक्ति-वर्ष रोजगार जैसे आकलित प्रभाव भी बताए गए।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक 8.69 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय से बढ़ाया; राजस्थान ने 17 मार्च को सुधार समझौता किया
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक 8.69 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय से बढ़ाने की मंजूरी दी। राजस्थान और मध्य प्रदेश ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत 17 मार्च 2026 को सुधारों से जुड़े समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
मुख्य तथ्य
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दी; कुल परिव्यय 8.69 लाख करोड़ रुपये और केंद्रीय सहायता 3.59 लाख करोड़ रुपये की गई।
- जल जीवन मिशन 2.0 में सुजलम भारत डिजिटल ढांचा शामिल है, जिसके तहत स्रोत से नल तक मानचित्रण के लिए हर गांव को अलग सुजल गांव या सेवा क्षेत्र पहचान दी जाती है।
- जल जीवन मिशन 2.0 का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराना है।
- राजस्थान और मध्य प्रदेश ने 17 मार्च 2026 को जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सुधारों से जुड़े समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए; राजस्थान का समझौता केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल और मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की उपस्थिति में हुआ।
- सुधारों से जुड़े समझौता ज्ञापन में 11 संरचनात्मक सुधार क्षेत्र शामिल हैं और पूरी हो चुकी पाइप जलापूर्ति योजनाओं को जल अर्पण प्रक्रिया से ग्राम पंचायतों या ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को सौंपना आवश्यक है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: दिसंबर 2028 तक 8.69 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय वाले जल जीवन मिशन 2.0 के पुनर्गठन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और सुधारों से जुड़े समझौता ज्ञापन ढांचे में राजस्थान की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक 8.69 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय से बढ़ाया। जल जीवन मिशन 2.0 में सुजलम भारत और जल अर्पण शामिल हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश ने 17 मार्च को सुधारों से जुड़े समझौते किए।
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2028 तक जल जीवन मिशन के विस्तार के लिए बढ़े हुए कुल परिव्यय को कितनी राशि पर मंजूरी दी?
11 मार्च 2026 को, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8.69 लाख करोड़ रुपये के बढ़े हुए कुल परिव्यय के साथ दिसंबर 2028 तक जल जीवन मिशन के विस्तार को मंजूरी दी, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है — मूल 2019 आवंटन पर 1.51 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि। राजस्थान एवं मध्य प्रदेश जेजेएम 2.0 के तहत सुधार-से-जुड़े समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने वाले पहले दो राज्य बने।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जल जीवन मिशन के विस्तार को मंत्रिमंडल ने कब मंजूरी दी और परिव्यय कितना था?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दी। कुल परिव्यय 8.69 लाख करोड़ रुपये और केंद्रीय सहायता 3.59 लाख करोड़ रुपये है।
जल जीवन मिशन 2.0 में सुजलम भारत क्या है?
यह राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा है। इसमें हर गांव को सुजल गांव या सेवा क्षेत्र की विशिष्ट पहचान दी जाती है, ताकि स्रोत से नल तक पेयजल आपूर्ति का डिजिटल मानचित्रण किया जा सके।
राजस्थान और मध्य प्रदेश ने सुधारों से जुड़े समझौता ज्ञापन कब किए?
PIB के अनुसार राजस्थान और मध्य प्रदेश ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत 17 मार्च 2026 को सुधारों से जुड़े समझौता ज्ञापन किए।
समझौते के ढांचे में जल अर्पण क्या है?
पूरी हो चुकी पाइप जलापूर्ति योजनाओं को जल अर्पण प्रक्रिया से ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों और समुदाय को औपचारिक रूप से सौंपा जाना है।
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