चेन्नई अक्टूबर 2025 से भारत की पहली रियल-टाइम बाढ़ पूर्वानुमान एवं स्थानिक निर्णय समर्थन प्रणाली (RTFF & SDSS) को पूरी तरह चालू करने वाला पहला शहर बना। लगभग ₹107.2 करोड़ की इस प्रणाली को विश्व बैंक के सहयोग से विकसित किया गया है तथा TNUIFSL इसका प्रबंधन करती है। यह प्रणाली चेन्नई, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू एवं रानीपेट जिलों के 4,974 वर्ग किमी क्षेत्र पर लागू है। झीलों, नदियों, तूफानी नालों एवं तटीय क्षेत्रों से रियल-टाइम डेटा एकत्र कर वेलाचेरी, नुंगंबक्कम, मांबलम जैसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में गली के स्तर तक जलभराव का पूर्वानुमान दिया जाता है। TN-Alert मोबाइल ऐप से सार्वजनिक अलर्ट जारी किए जाते हैं।
चेन्नई भारत की पहली रीयल-टाइम बाढ़ पूर्वानुमान और स्थान-आधारित निर्णय सहायता प्रणाली लागू करने वाला शहर बना
चेन्नई अक्टूबर 2025 से भारत की पहली रियल-टाइम बाढ़ पूर्वानुमान एवं स्थानिक निर्णय समर्थन प्रणाली (RTFF & SDSS) पूर्णतः क्रियाशील करने वाला पहला शहर बना। लगभग ₹107.2 करोड़ की इस प्रणाली को विश्व बैंक के सहयोग से विकसित किया गया है तथा TNUIFSL इसका प्रबंधन करती है। यह प्रणाली चेन्नई, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू एवं रानीपेट जिलों के 4,974 वर्ग किमी क्षेत्र में लागू है। झीलों, नदियों, तूफानी नालों एवं तटीय क्षेत्रों से रियल-टाइम डेटा एकत्र कर वेलाचेरी, नुंगंबक्कम, मांबलम जैसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में गली स्तर पर जलभराव का पूर्वानुमान दिया जाता है। TN-Alert मोबाइल ऐप से सार्वजनिक अलर्ट जारी किए जाते हैं।
मुख्य तथ्य
- चेन्नई बाढ़ का रियल-टाइम पूर्वानुमान और स्थानिक निर्णय सहायता प्रणाली लागू करने वाला भारत का पहला शहर बना।
- यह प्रणाली चेन्नई, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू और रानीपेट सहित 4,974 वर्ग किमी क्षेत्र को शामिल करती है।
- विश्व बैंक के सहयोग से लगभग ₹107.2 करोड़ में विकसित; प्रबंधन TNUIFSL द्वारा।
- यह प्रणाली वेलाचेरी और नुंगंबक्कम जैसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में गलियों तक के स्तर पर जलभराव का पूर्वानुमान देती है।
- TN-Alert मोबाइल ऐप से नागरिकों को सार्वजनिक अलर्ट जारी किए जाते हैं।
- जिन चार नदी उप-बेसिनों की निगरानी की जाती है, वे अडयार, कूम, कोसस्थलैयार और कोवलम हैं।
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चेन्नई की RTFF & SDSS प्रणाली किन चार नदी उप-बेसिनों पर निगरानी रखती है?
निगरानी किए गए चार नदी उप-बेसिन अडयार, कूवम, कोसस्थलैयार और कोवलम हैं। यह प्रणाली चेन्नई, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू और रानीपेट जिलों के 4,974 वर्ग किमी क्षेत्र में लागू है और वेलाचेरी, नुंगमबक्कम तथा मांबलम सहित उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के लिए सड़क-स्तर पर बाढ़ पूर्वानुमान तैयार करती है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चेन्नई में लागू RTFF & SDSS प्रणाली क्या है और इसका भौगोलिक दायरा क्या है?
रियल-टाइम बाढ़ पूर्वानुमान एवं स्थानिक निर्णय समर्थन प्रणाली (RTFF & SDSS) भारत की पहली शहर-स्तरीय रियल-टाइम बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली है, जो अक्टूबर 2025 से चेन्नई में क्रियाशील है। पाँच जिलों में इसका दायरा 4,974 वर्ग किमी है: चेन्नई, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू और रानीपेट। यह प्रणाली झीलों, नदियों, वर्षा-जल निकासी नालों और तटीय क्षेत्रों से प्राप्त रियल-टाइम डेटा के आधार पर गली-स्तर तक जलभराव का पूर्वानुमान तैयार करती है।
चेन्नई की बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली किसने विकसित की, इसका प्रबंधन कौन करता है और कुल लागत क्या थी?
चेन्नई की RTFF & SDSS विश्व बैंक की वित्तीय सहायता से लगभग ₹107.2 करोड़ की लागत से विकसित की गई। इसका प्रबंधन राज्य सरकार के अधीन TNUIFSL (तमिलनाडु शहरी अवसंरचना वित्तीय सेवा लिमिटेड) करती है। विश्व बैंक का सहयोग शहरी लचीलेपन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचे के तहत दिया गया।
चेन्नई की बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली किन चार नदी उप-बेसिनों की निगरानी करती है?
RTFF & SDSS चार नदी उप-बेसिनों की निगरानी करती है: अडयार, कूम, कोसस्थलैयार और कोवलम। ये नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं और उत्तर-पूर्व मानसून के दौरान बाढ़-प्रवण हैं। यह प्रणाली शुरुआती बाढ़ चेतावनी देने के लिए इन उप-बेसिनों के प्रमुख गेजिंग स्टेशनों पर जल स्तर पर नज़र रखती है।
चेन्नई RTFF & SDSS जनता को बाढ़ अलर्ट कैसे पहुँचाती है?
RTFF & SDSS से जारी बाढ़ अलर्ट TN-Alert मोबाइल ऐप से नागरिकों तक पहुँचाए जाते हैं। यह प्रणाली गली स्तर पर जलभराव का पूर्वानुमान देती है, जिससे वेलाचेरी, नुंगंबक्कम और मांबलम जैसे ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्रों के निवासी बाढ़ से पहले समय पर अपने स्थान के हिसाब से चेतावनी पा सकते हैं।
भारत में शहरी आपदा प्रबंधन के लिए चेन्नई की रियल-टाइम बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली क्यों महत्वपूर्ण है?
चेन्नई की 2015 की विनाशकारी बाढ़, जिसमें 500 से अधिक मौतें और ₹20,000 करोड़ से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ, ने शहरी बाढ़ तैयारी में गंभीर खामियाँ उजागर कीं। RTFF & SDSS भारत की पहली काम कर रही रियल-टाइम शहर-स्तरीय बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली है, जो अन्य बाढ़-प्रवण शहरों के लिए अपनाया जा सकने वाला मॉडल है। यह स्थानिक डेटा और गणितीय मॉडलों पर आधारित पूर्वानुमान का उपयोग कर प्रतिक्रियाशील बाढ़ राहत से सक्रिय बाढ़ जोखिम प्रबंधन की ओर बदलाव को दर्शाती है।
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