भारतीय रिजर्व बैंक ने वाणिज्यिक बैंकों के जिम्मेदार कारोबारी आचरण से जुड़े तृतीय संशोधन निर्देश, 2026 का मसौदा जारी किया है। इन मसौदा निर्देशों का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों की सुरक्षा मज़बूत करना है। मसौदे के अनुसार ये प्रावधान 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे। इनका मुख्य उद्देश्य अनधिकृत और धोखाधड़ी वाले डिजिटल लेनदेन में ग्राहक की देयता सीमित करना है, ताकि ग्राहक को बेवजह नुकसान न उठाना पड़े, चाहे गलती बैंक या बैंकिंग व्यवस्था की हो या किसी तीसरे पक्ष ने सुरक्षा में सेंध लगाई हो।

मसौदा निर्देशों के तहत बैंकों को ग्राहक-सुरक्षा नीति बनानी होगी। इसमें लेनदेन अलर्ट, ग्राहकों के अधिकार और दायित्व, शिकायतों के निपटारे की समय-सीमा, जोखिमों के प्रति जागरूकता और शिकायत को उच्च स्तर पर ले जाने की प्रक्रिया शामिल होगी। बैंक को ₹500 से अधिक के इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन पर तुरंत एसएमएस अलर्ट भेजना होगा। जिस ग्राहक ने अपना ईमेल पता दिया है, उसे ईमेल अलर्ट भी भेजना होगा। धोखाधड़ी वाला लेनदेन होने पर ग्राहक को जल्द से जल्द बैंक के साथ-साथ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। बैंक को शिकायत दर्ज करने की सुविधा 24 घंटे, सातों दिन देनी होगी। लेनदेन अलर्ट वाले एसएमएस में ऐसा नंबर भी देना होगा जिस पर ग्राहक तुरंत आपत्ति दर्ज कर सके और बैंक की वेबसाइट पर शिकायत का सीधा लिंक उपलब्ध होना चाहिए।

देयता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि ग्राहक की देयता साबित करने का भार बैंक पर होगा। बैंक की लापरवाही के मामले में ग्राहक शिकायत करे या न करे, उसकी देयता शून्य होगी और उसे लेनदेन की राशि वापस मिलेगी। किसी तीसरे पक्ष द्वारा सुरक्षा में सेंध लगाए जाने पर भी यही राहत मिलेगी, बशर्ते ग्राहक 5 कैलेंडर दिनों के भीतर शिकायत कर दे। बैंक को अपनी नीति के तहत देयता तय करके अधिकतम 30 कैलेंडर दिनों में जवाब देना होगा। कम राशि की धोखाधड़ी में, ₹50,000 तक का सकल नुकसान झेलने वाले पात्र व्यक्ति को शुद्ध नुकसान का 85% या ₹25,000, जो भी कम हो, जीवन में केवल एक बार मुआवजे के रूप में मिल सकता है। परीक्षा की दृष्टि से यह विषय RBI के नियमन, उपभोक्ता संरक्षण, डिजिटल भुगतान की सुरक्षा और वित्तीय समावेशन से जुड़ा है। प्रारंभिक परीक्षा में इसके लागू होने की तारीख, दायरे और देयता संबंधी प्रावधानों पर सवाल पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में डिजिटल अर्थव्यवस्था पर भरोसे, बैंकों की जवाबदेही और शिकायत निवारण के संदर्भ में इसका उपयोग किया जा सकता है।