प्रकाशित: 11 मार्च 2026PIBअर्थव्यवस्था
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नई जीडीपी श्रृंखला जारी की; नाममात्र जीडीपी 3.3% कम
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने के साथ संशोधित जीडीपी अनुमान जारी किए। नॉमिनल अर्थव्यवस्था लगभग 3.3% सिकुड़ी — वित्त वर्ष 2025-26 की नाममात्र जीडीपी अनुमानित ₹357 लाख करोड़ से ₹345 लाख करोड़ हो गई। लेकिन वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.6% अनुमानित है।
यह संशोधन डिजिटलीकरण, उद्यमों के औपचारिकीकरण और उपभोग के पैटर्न में बदलाव को दर्शाता है। नई श्रृंखला बेंचमार्क संकेतकों के बजाय विस्तृत संस्थागत डेटा का उपयोग करती है। पिछली श्रृंखला के आंकड़े दिसंबर 2026 तक अपेक्षित हैं।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत की जीडीपी के आधार वर्ष को 2022-23 में बदलने के पीछे राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की तर्क-प्रणाली का विश्लेषण कीजिए तथा वित्त वर्ष 2025-26 की वास्तविक आर्थिक वृद्धि के मापन पर इसके निहितार्थों की चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने जीडीपी का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया; वित्त वर्ष 2025-26 की नॉमिनल जीडीपी 3.3% घटकर 357 लाख करोड़ रुपये से 345 लाख करोड़ रुपये रह गई, जबकि वास्तविक वृद्धि पुरानी श्रृंखला के 7.1% से बढ़कर 7.6% हो गई। नई कार्यप्रणाली विस्तृत संस्थागत आंकड़ों पर आधारित है।
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