राजस्थान सरकार ने 2-15 अक्टूबर 2025 के दौरान सहकार सदस्यता अभियान चलाया। इसका सीधा लक्ष्य राज्यभर में सहकारी समितियों की सदस्यता में 10% बढ़ोतरी करना था। अभियान के लिए राजस्थान में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के स्तर पर 8,600 शिविर लगाए गए, ताकि गाँवों और पंचायतों तक सदस्यता प्रक्रिया को पहुँचाया जा सके। सहकारिता मंत्री गौतम कुमार डाक ने महिलाओं, युवाओं और उन पंचायतों पर विशेष ध्यान देने की बात कही जहाँ अभी प्राथमिक कृषि ऋण समितियों की पहुँच नहीं है। शुरुआती दिनों में 1.5 लाख से अधिक सदस्यता आवेदन मिलना इस अभियान की जमीन पर पकड़ को दिखाता है।

परीक्षा की दृष्टि से प्राथमिक कृषि ऋण समितियों की भूमिका समझना जरूरी है, क्योंकि वे गाँव के स्तर की सहकारी ऋण संस्थाएं हैं। वे किसानों को अल्पकालिक कृषि ऋण और सेवाएं देने, औपचारिक ऋण तक पहुँच बढ़ाने, आदान आपूर्ति और सरकारी योजनाओं से गाँवों को जोड़ने में भूमिका निभाती हैं। इसलिए सदस्यता बढ़ाने का अर्थ केवल संख्या बढ़ाना नहीं है; इससे सहकारी ढांचे की पहुँच, प्रतिनिधित्व और ग्रामीण वित्तीय समावेशन मजबूत हो सकता है।

अभियान मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के सहकारिता-आधारित ग्रामीण समृद्धि एजेंडे से भी जुड़ा है। महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता देने से सहकारी समितियों में भागीदारी का सामाजिक आधार बढ़ता है, जबकि बिना प्राथमिक कृषि ऋण समितियों वाली पंचायतों पर ध्यान देने से क्षेत्रीय कवरेज की कमी घट सकती है। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में इससे प्रीलिम्स में तथ्यात्मक प्रश्न, राजस्थान प्रशासन और अर्थव्यवस्था के स्टैटिक जीके लिंक, तथा मुख्य परीक्षा में ग्रामीण विकास, संस्थागत ऋण और समावेशी शासन का उदाहरण बन सकता है।