प्रकाशित: 7 फ़रवरी 2026PIBअर्थव्यवस्था
भारत ने केंद्रीय योजना के तहत 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) का गठन पूरा किया; 21.96 लाख महिला किसानों का नामांकन हुआ
भारत सरकार ने 2020 में शुरू की गई केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के गठन का लक्ष्य पूरा किया। 7 फरवरी 2026 के आसपास मिली इस उपलब्धि के साथ किसानों को संगठित करने का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य पूरा हुआ। योजना को तीन क्रियान्वयन एजेंसियों ने मिलकर लागू किया: राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD), लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (SFAC) और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC)।
इन 10,000 FPO में 21.96 लाख महिला किसानों का नामांकन हुआ है। इससे पता चलता है कि खेती से बाज़ार तक की पूरी व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की ठोस कोशिश की गई है। FPO छोटे और सीमांत किसानों के सामूहिक संगठन हैं। इनके ज़रिए किसान अपनी उपज एकत्र करते हैं, बिचौलियों से मोलभाव की ताकत बढ़ाते हैं, कम कीमत पर बड़ी मात्रा में कृषि इनपुट खरीदते हैं और अपनी उपज के लिए बाज़ार तक बेहतर पहुँच बनाते हैं।
योजना के तहत प्रत्येक FPO को 18 लाख रुपये तक प्रबंधन सहायता, उसके योगदान के बराबर अधिकतम 15 लाख रुपये का इक्विटी अनुदान और संस्थागत ऋण तक पहुँच आसान बनाने के लिए ऋण गारंटी कोष मिलता है। राजस्थान में छोटे और सीमांत किसानों की बड़ी आबादी है, खासकर शेखावाटी, हाड़ौती और मारवाड़ क्षेत्रों में, और राज्य ने इस योजना में सक्रिय भागीदारी की है। राजस्थान के FPO तिलहन, दलहन, जीरा, धनिया और बागवानी से जुड़े समूहों में खास तौर पर सक्रिय हैं। यह राज्य की कृषि में विविधता बढ़ाने के लक्ष्य के अनुरूप है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 2020 की केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत भारत में 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के गठन का छोटे और सीमांत किसानों के लिए महत्व समझाइए और राजस्थान पर इसके असर की चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
फरवरी 2026 तक भारत ने NABARD, SFAC और NCDC द्वारा लागू केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत 10,000 FPO बनाए। योजना में प्रत्येक FPO को 18 लाख रुपये तक प्रबंधन सहायता और उसके योगदान के बराबर अधिकतम 15 लाख रुपये का इक्विटी अनुदान मिलता है। 21.96 लाख महिला किसानों का नामांकन हुआ। राजस्थान के FPO तिलहन, दलहन, जीरा और धनिया एकत्र कर छोटे किसानों की मोलभाव की ताकत बढ़ाते हैं।
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जुड़ा प्रश्नआसान
केंद्रीय एफपीओ योजना के तहत कितने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन किया गया है?
व्याख्या · सही उत्तर Cभारत ने केंद्रीय योजना के तहत 10,000 किसान उत्पादक संगठनों का गठन पूरा किया, जिसमें 21.96 लाख महिला किसानों को नामांकित किया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
किसान उत्पादक संगठन (FPO) क्या होता है और इसकी कानूनी संरचना कैसी होती है?
FPO किसानों, खासकर छोटे और सीमांत किसानों, का सामूहिक संगठन है। इसे संसाधन जुटाने, कृषि इनपुट की लागत घटाने और बाज़ार तक पहुँच बेहतर बनाने के लिए बनाया जाता है। यह उत्पादक कंपनी या सहकारी संस्था के रूप में पंजीकृत हो सकता है, जिसमें किसान-सदस्यों की पूँजीगत हिस्सेदारी होती है और उन्हें मुनाफ़े में हिस्सा मिलता है।
10,000 FPO की योजना को लागू करने वाली तीन एजेंसियाँ कौन-सी हैं?
2020 में शुरू हुई 10,000 FPO की केंद्रीय क्षेत्र योजना को तीन एजेंसियाँ लागू करती हैं: राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD), लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (SFAC) और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC)।
योजना के तहत प्रत्येक FPO को कितनी वित्तीय सहायता मिलती है?
केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत प्रत्येक FPO को 18 लाख रुपये तक प्रबंधन सहायता और उसके योगदान के बराबर अधिकतम 15 लाख रुपये का इक्विटी अनुदान मिल सकता है। इससे FPO का कामकाज और शेयर पूँजी मज़बूत होती है। ऋण गारंटी कोष से उपज एकत्र करने, कृषि इनपुट खरीदने और प्रसंस्करण ढाँचा बनाने के लिए आगे ऋण लेना आसान होता है।
इस योजना में कितनी महिला किसानों का नामांकन हुआ है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
इस योजना के तहत देशभर के FPO में कुल 21.96 लाख महिला किसानों का नामांकन हुआ है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे महिला किसानों को संगठित बाज़ारों और वित्तीय सेवाओं तक पहुँच मिलती है तथा पंजीकृत संगठनों के फैसलों में उनकी भागीदारी बढ़ती है।
राजस्थान के FPO किन कृषि उत्पाद समूहों में खास तौर पर सक्रिय हैं?
राजस्थान के FPO मसाले, तिलहन और दलहन से जुड़े समूहों में खास तौर पर सक्रिय हैं। ये राजस्थान के प्रमुख कृषि क्षेत्र हैं। मिलकर उपज एकत्र करने से किसानों को बेहतर दाम पर मोलभाव करने, बिचौलियों पर होने वाला खर्च घटाने और संगठित बाज़ारों तक पहुँच बनाने में मदद मिलती है।