भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 6 फरवरी 2026 को ड्राफ्ट क्रेडिट डेरिवेटिव्स दिशानिर्देश 2026 जारी किए। इनमें भारत के कॉर्पोरेट बॉन्ड बाज़ार को और गहरा बनाने तथा उपलब्ध वित्तीय उपकरणों की श्रेणी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।

मुख्य प्रस्तावों में कॉर्पोरेट बॉन्ड पर टोटल रिटर्न स्वैप (TRS) और क्रेडिट इंडेक्स डेरिवेटिव्स की अनुमति देना शामिल है। TRS एक वित्तीय समझौता है, जिसमें एक पक्ष संदर्भ परिसंपत्ति का कुल आर्थिक प्रदर्शन, यानी ब्याज आय और पूंजी लाभ सहित, दूसरे पक्ष को हस्तांतरित करता है। कॉर्पोरेट बॉन्ड पर TRS की अनुमति से मूल्य निर्धारण बेहतर होने, संस्थागत निवेशकों को हेजिंग के बेहतर साधन मिलने और कॉर्पोरेट ऋण के द्वितीयक बाज़ार में तरलता बढ़ने की उम्मीद है।

क्रेडिट इंडेक्स डेरिवेटिव्स एकल इकाई के बजाय क्रेडिट एक्सपोजर के एक समूह पर आधारित उपकरण हैं। इनके ज़रिए निवेशक क्रेडिट जोखिम पर विविध स्थिति ले सकेंगे, जिससे एकाग्रता जोखिम कम होगा।

ड्राफ्ट दिशानिर्देशों में REIT और InvIT बैंक ऋण के लिए भी प्रस्ताव शामिल हैं: किसी एक REIT या InvIT पर 49% बैंक एक्सपोजर सीमा और ऋण देने से पहले न्यूनतम 3 वर्षों के संचालन की शर्त। इन प्रावधानों से बैंक बैलेंस शीट की सुरक्षा बनाए रखते हुए बुनियादी ढाँचे में ऋण प्रवाह बढ़ाने में मदद मिलेगी।

भारत का कॉर्पोरेट बॉन्ड बाज़ार बैंक ऋण की तुलना में कम विकसित है और कुल व्यावसायिक वित्त का केवल लगभग 17% है। RBI के ये कदम भारत के बॉन्ड बाज़ार को विकसित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।