4 फरवरी 2026 को अंतरिक्ष राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने घोषणा की कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2026 के लिए 18 कक्षीय मिशनों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इनमें भारतीय निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष कंपनियों — स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉस्मॉस और पिक्सेल — के छह प्रक्षेपण शामिल हैं, जो भारत की उभरती वाणिज्यिक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
यह घोषणा PSLV-C62 मिशन विफलता से ISRO के उबरने की प्रक्रिया के बीच आई है। इस विफलता ने एजेंसी की प्रक्षेपण रफ्तार को बाधित किया था। इसके अलावा ISRO ने NaVIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) में परमाणु घड़ी से जुड़ी लगातार समस्याओं को भी स्वीकार किया, जो कुछ नेविगेशन पेलोड की विश्वसनीयता को प्रभावित कर रही हैं। इन चुनौतियों के बावजूद 2026 की मिशन सूची ISRO के इतिहास में सबसे महत्वाकांक्षी है।
योजनाबद्ध प्रमुख मिशनों में गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम शामिल है, जिसके लिए GSLV Mk-III (जिसे LVM3 भी कहते हैं) प्रक्षेपण वाहन के रूप में काम करेगा। वर्ष में ISRO के लघु उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (SSLV) और नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) के परीक्षण के साथ-साथ भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के पूर्वगामी मिशन भी होंगे।
छह निजी क्षेत्र के प्रक्षेपणों का शामिल होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। स्काईरूट ने विक्रम रॉकेट श्रृंखला विकसित की है; अग्निकुल अपना अग्निबाण प्रक्षेपण वाहन आगे बढ़ा रहा है; और पिक्सेल हाइपरस्पेक्ट्रल पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों का एक समूह बना रहा है। इस पूरे तंत्र को आगे बढ़ाने वाली नीति IN-SPACe (इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर) है।
भारत की बढ़ती प्रक्षेपण क्षमता देश को वैश्विक लघु-उपग्रह बाजार में एक उभरते प्रक्षेपण सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित कर रही है।
