पंचायती राज मंत्रालय ने 4 मई 2026 को पंचायत विकास योजनाओं की तैयारी पर राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। प्रारंभिक सत्र में पंचायत विकास योजना 2026-27 के लिए जन योजना अभियान पुस्तिका, ग्राम पंचायत विकास योजनाओं की गुणवत्ता बढ़ाने वाली समिति की रिपोर्ट और संशोधित ई-ग्रामस्वराज योजना पोर्टल जारी किए गए। कार्यशाला का उद्देश्य स्थानीय योजना को अधिक सहभागी, समावेशी और परिणामोन्मुख बनाना था।

सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजनाओं का लक्ष्य केवल अनुपालन नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण परिणाम और जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव होना चाहिए। उन्होंने बेहतर परिसंपत्ति निर्माण को संसाधनों की बर्बादी रोकने से जोड़ा तथा स्थिरता, स्पष्ट संस्थागत जिम्मेदारियां, प्रभावी संसाधन उपयोग, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों और ग्राम सभाओं में अधिक नागरिक भागीदारी पर बल दिया।

पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीणा ने कहा कि जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण ने व्यापक अवसंरचना बनाई है, लेकिन उसके सतत संचालन, रखरखाव और प्रभावी उपयोग के लिए अब ग्राम पंचायत योजना को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने संसाधन उपयोग, परिसंपत्ति रखरखाव और डिजिटल पारदर्शिता को जोड़ने वाली गतिशील योजनाओं की जरूरत बताई तथा ग्राम स्वास्थ्य और स्वच्छता समितियों और स्वयं के राजस्व स्रोतों पर भी जोर दिया।

अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि धन उपलब्ध होने के बावजूद गतिविधियों की पुनरावृत्ति और केंद्रीय व राज्य योजनाओं के कमजोर अभिसरण से परिणाम सीमित रह जाते हैं। उन्होंने 16वें वित्त आयोग के तहत ग्रामीण स्थानीय निकायों के आवंटन में 84 प्रतिशत वृद्धि, 2026-31 के लिए 4.35 लाख करोड़ रुपये और ग्राम पंचायत विकास योजना के 15 गुणवत्ता संकेतकों का उल्लेख किया। सत्रों में अनटाइड अनुदान, स्वयं सहायता समूह अभिसरण, पेसा योजना, ग्राम मानचित्र और पंचायत उन्नति सूचकांक आधारित साक्ष्यपूर्ण योजना भी शामिल रही।