प्रकाशित: 7 मार्च 2026समाचार स्रोतविज्ञान-प्रौद्योगिकी
IISc और प्रतीक्षा ट्रस्ट ने लकवाग्रस्त मरीज़ों की चलने-फिरने की क्षमता बहाल करने के लिए ब्रेन को-प्रोसेसर मूनशॉट लॉन्च किया
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु ने प्रतीक्षा ट्रस्ट (नंदन एवं रोहिणी नीलेकणि द्वारा स्थापित) के सहयोग से भारत का पहला बड़ा संस्थागत ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) मूनशॉट कार्यक्रम शुरू किया है। इस परियोजना का लक्ष्य ऐसा प्रत्यारोपण योग्य उपकरण विकसित करना है, जो लकवाग्रस्त मरीज़ के मस्तिष्क से तंत्रिका संकेत पढ़कर उन्हें मोटर और संवेदी क्षमताएँ बहाल करने वाले आदेशों में बदल सके और इस तरह क्षतिग्रस्त रीढ़ की हड्डी या तंत्रिका मार्गों को बाईपास कर सके।
BCI मस्तिष्क और बाहरी उपकरण के बीच सीधा संचार चैनल स्थापित करता है। IISc की परियोजना में क्लोज्ड-लूप प्रणाली की परिकल्पना है: मोटर कॉर्टेक्स में लगाए गए इलेक्ट्रोड तंत्रिका संकेत रिकॉर्ड करते हैं, जिन्हें एक AI चिप डिकोड करती है और वास्तविक समय में मांसपेशियों या रोबोटिक अंगों को उत्तेजित करती है।
वैश्विक स्तर पर BrainGate (ब्राउन विश्वविद्यालय, स्टैनफोर्ड) और Neuralink के मानव परीक्षण प्रमुख उदाहरण हैं। IISc का कार्यक्रम भारत में सरकार, शिक्षण संस्थान और परोपकारी ट्रस्ट की पहली ऐसी साझेदारी है।
यह परियोजना न्यूरल डेटा गोपनीयता, संज्ञानात्मक स्वतंत्रता और न्यूरोटेक तक समान पहुँच जैसे बायोएथिक्स प्रश्न भी उठाती है, जो RPSC पाठ्यक्रम की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IISc ब्रेन को-प्रोसेसर परियोजना क्या है?
यह IISc बेंगलुरु और प्रतीक्षा ट्रस्ट द्वारा शुरू की गई भारत की पहली संस्थागत BCI मूनशॉट परियोजना है। इसका उद्देश्य लकवाग्रस्त मरीजों के मोटर कॉर्टेक्स से तंत्रिका संकेत पढ़कर मांसपेशियों या रोबोटिक अंगों को उत्तेजित करना और स्वैच्छिक गत्यात्मक क्षमता बहाल करना है।
ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) क्या है?
BCI मस्तिष्क और बाहरी उपकरण के बीच सीधे संचार का मार्ग है। इसमें तंत्रिका संकेतों को पकड़ा जाता है, AI एल्गोरिदम से डिकोड किया जाता है और फिर उनसे मशीनों तथा कृत्रिम अंगों को नियंत्रित करने या मांसपेशियों को उत्तेजित करने में मदद ली जाती है।
प्रतीक्षा ट्रस्ट कौन है?
प्रतीक्षा ट्रस्ट नंदन नीलेकणि और रोहिणी नीलेकणि द्वारा स्थापित परोपकारी संस्था है, जो विज्ञान, सामाजिक समता और तकनीक को वित्तीय सहायता देती है। IISc के साथ इसकी साझेदारी भारतीय न्यूरोटेक में सरकार, शिक्षा जगत और परोपकार क्षेत्र की पहली भागीदारी है।
BCI तकनीक से जुड़ी नैतिक चिंताएँ क्या हैं?
प्रमुख चिंताएँ हैं: (1) न्यूरल डेटा की गोपनीयता; (2) संज्ञानात्मक स्वतंत्रता — यानी विचारों की निगरानी न होने का अधिकार; (3) समान पहुँच; (4) चिकित्सा और संवर्धन के बीच की सीमा; (5) भारत में न्यूरोटेक के लिए अलग नियामक ढाँचे का अभाव।
यह RAS/RPSC परीक्षा के लिए कैसे प्रासंगिक है?
पेपर I (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — बायोमेडिकल उपकरण) और पेपर III (नीतिशास्त्र — बायोएथिक्स, संज्ञानात्मक स्वतंत्रता) दोनों के लिए प्रासंगिक है।