23 नवंबर 2025 के आसपास, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका में G20 नेता शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दौरे पर थे। दक्षिण अफ्रीका की G20 अध्यक्षता का विषय 'एकजुटता, समानता, सततता' था। भारत ने तीन प्राथमिकताओं पर जोर दिया: जलवायु न्याय — CBDR (साझा परंतु विभेदित जिम्मेदारियाँ) और विकासशील देशों के लिए हरित वित्त; वैश्विक विकास सहयोग — AI, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और स्वास्थ्य सुरक्षा में; और अफ्रीका तथा ग्लोबल साउथ के साथ दक्षिण-दक्षिण सहयोग। भारत ने दिल्ली G20 (2023) विरासत को आगे बढ़ाते हुए 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' की अवधारणा को सुदृढ़ किया। राजस्थान की G20-संबंधित प्रासंगिकता में राज्य की अक्षय ऊर्जा क्षमता (30 GW से अधिक), इन्वेस्ट राजस्थान समिट और वैश्विक पर्यटन-जलवायु नीति का अंतरसंबंध शामिल है।
जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन में PM मोदी: जलवायु, विकास और दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर भारत के वैश्विक नेतृत्व का एजेंडा
23 नवंबर 2025 के आसपास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका में G20 नेता शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दौरे पर थे। दक्षिण अफ्रीका की G20 अध्यक्षता का विषय 'एकजुटता, समानता, सततता' था। भारत ने तीन प्राथमिकताओं पर जोर दिया: जलवायु न्याय, जिसमें CBDR (साझा परंतु विभेदित जिम्मेदारियाँ) और विकासशील देशों के लिए हरित वित्त शामिल हैं; वैश्विक विकास सहयोग, खासकर AI, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और स्वास्थ्य सुरक्षा में; और अफ्रीका तथा ग्लोबल साउथ के साथ दक्षिण-दक्षिण सहयोग। भारत ने दिल्ली G20 (2023) विरासत को आगे बढ़ाते हुए 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' की अवधारणा को सुदृढ़ किया। राजस्थान के संदर्भ में G20 की प्रासंगिकता राज्य की अक्षय ऊर्जा क्षमता (30 GW से अधिक), इन्वेस्ट राजस्थान समिट और वैश्विक पर्यटन व जलवायु नीति के आपसी संबंध से जुड़ी है।
मुख्य तथ्य
- PM मोदी ने 'एकजुटता, समानता, सतत विकास' विषय पर आयोजित जोहान्सबर्ग G20 शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
- भारत ने CBDR और विकासशील देशों के लिए हरित वित्त पर बल देकर जलवायु न्याय पर जोर दिया।
- प्राथमिकताओं में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्वास्थ्य सुरक्षा और दक्षिण-दक्षिण सहयोग शामिल।
- भारत ने दिल्ली G20 (2023) की 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' विरासत को आगे बढ़ाया।
- शिखर सम्मेलन में भारत ने जलवायु वित्त पर वैश्विक दक्षिण और वैश्विक उत्तर के बीच सेतु की भूमिका निभाई।
- राजस्थान की 30+ GW अक्षय ऊर्जा क्षमता भारत की G20 प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में सीधे मदद करती है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में नवंबर 2025 जोहान्सबर्ग जी-20 नेता शिखर सम्मेलन में भारत की प्रमुख एजेंडा प्राथमिकताओं तथा राजस्थान की अक्षय-ऊर्जा रूपरेखा से उनकी प्रासंगिकता का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
23 नवंबर 2025 के आसपास जोहान्सबर्ग में प्रधानमंत्री मोदी ने साझा परंतु विभेदित जिम्मेदारियों के आधार पर जलवायु न्याय, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर वैश्विक विकास सहयोग, तथा 'एकजुटता, समानता, सततता' विषय के तहत दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर बल दिया। भारत का 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म स्थापित विद्युत क्षमता लक्ष्य राजस्थान की 30 से अधिक गीगावाट क्षमता से जुड़ता है।
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नवंबर 2025 में G20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी किस शहर ने की?
नवंबर 2025 में G20 नेताओं का शिखर सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में जोहानसबर्ग, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित किया गया।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जोहान्सबर्ग G20 शिखर सम्मेलन का विषय क्या था और इसकी अध्यक्षता किसने की?
जोहान्सबर्ग G20 शिखर सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। इसका विषय 'समृद्ध, समावेशी, सतत अफ्रीका के लिए एकजुटता, समानता और सतत विकास' था। PM मोदी लगभग 23 नवंबर 2025 को इसमें शामिल हुए।
जोहान्सबर्ग G20 में भारत ने किन तीन प्राथमिकताओं पर जोर दिया?
भारत ने तीन प्राथमिकताएं रखीं — जलवायु न्याय (CBDR और विकासशील देशों के लिए हरित वित्त), वैश्विक विकास सहयोग (AI, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और स्वास्थ्य सुरक्षा), और अफ्रीका तथा ग्लोबल साउथ के साथ दक्षिण-दक्षिण सहयोग।
CBDR क्या है और भारत इसे G20 बैठकों में क्यों उठाता है?
CBDR यानी 'साझा परंतु विभेदित जिम्मेदारियाँ' — इसका अर्थ है कि जलवायु कार्रवाई की जिम्मेदारी सबकी है, लेकिन ऐतिहासिक उत्सर्जकों (अमीर देशों) पर अधिक बाध्यता है। भारत CBDR उठाकर विकसित देशों से हरित वित्त और तकनीक हस्तांतरण की मांग करता है।
दिल्ली G20 की विरासत जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन से कैसे जुड़ती है?
2023 के दिल्ली G20 में भारत ने 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' का नारा दिया और अफ्रीकी संघ को स्थायी G20 सदस्यता दिलाई। जोहान्सबर्ग में भारत ने इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए ग्लोबल साउथ के पक्ष में जलवायु वित्त और डिजिटल विकास पर आवाज उठाई।
G20 प्रतिबद्धताओं के संदर्भ में राजस्थान की अक्षय ऊर्जा क्षमता का क्या महत्व है?
राजस्थान में 30 GW से अधिक स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता है, जो इसे सौर और पवन ऊर्जा में अग्रणी राज्यों में शामिल करती है। यह भारत की G20 बैठकों में की गई जलवायु प्रतिबद्धताओं को जमीनी स्तर पर लागू करने का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
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