28 सितंबर 2025 को मुंबई में हुई 94वीं वार्षिक आम बैठक में दिल्ली के पूर्व रणजी कप्तान मिथुन मन्हास को बीसीसीआई का 37वां अध्यक्ष निर्विरोध चुना गया। उन्होंने रोजर बिन्नी का स्थान लिया। इसी बैठक के बाद राजीव शुक्ला उपाध्यक्ष और देवजीत सैकिया सचिव पद पर बने रहे, इसलिए भारतीय क्रिकेट प्रशासन में नेतृत्व में बदलाव के साथ प्रशासनिक निरंतरता भी बनी रही।
परीक्षा की दृष्टि से यह खबर केवल खेल समाचार नहीं है। यह खेल प्रशासन, संस्थागत नेतृत्व और राष्ट्रीय स्तर की एक प्रमुख खेल संस्था के कामकाज से जुड़ी समसामयिकी है। बीसीसीआई को भारतीय क्रिकेट की शीर्ष संस्था माना जाता है और इसके अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सचिव जैसे पद क्रिकेट नीति, आयोजन और प्रशासनिक दिशा से जुड़े होते हैं। इसलिए प्रारंभिक परीक्षा में सीधे तथ्य पूछे जा सकते हैं: अध्यक्ष का नाम, क्रम संख्या, चुनाव की तारीख, बैठक का स्थान, पूर्व अध्यक्ष और अन्य प्रमुख पदाधिकारी।
मिथुन मन्हास की पृष्ठभूमि भी याद रखने लायक है, क्योंकि वे दिल्ली रणजी ट्रॉफी टीम के पूर्व कप्तान और अनुभवी घरेलू क्रिकेटर रहे हैं। रोजर बिन्नी का नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मन्हास ने उन्हीं की जगह ली। राजीव शुक्ला और देवजीत सैकिया के पदों पर बने रहने से संस्थागत स्थिरता का पहलू सामने आता है। स्टैटिक जीके से जोड़कर देखें तो यह विषय भारत में खेल संघों की प्रशासनिक संरचना, क्रिकेट के आर्थिक प्रभाव और विश्व क्रिकेट में भारतीय बोर्ड की भूमिका से जुड़ता है। मुख्य परीक्षा में इसे खेल प्रशासन और संस्थागत निरंतरता के छोटे उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
