22 जनवरी 2026 की इस समसामयिकी का केंद्र बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की भारतीय स्किमर संरक्षण परियोजना है। यह परियोजना राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत गंगा बेसिन में भारतीय स्किमर, यानी राइन्कॉप्स एल्बिकॉलिस, के घोंसला बनाने वाले आवासों की सुरक्षा से जुड़ी है। परियोजना घोंसला स्थलों की निगरानी करेगी और इस प्रजाति के लिए आवास प्रबंधन योजनाएं तैयार करेगी।

भारतीय स्किमर नदी से जुड़ा पक्षी है। इसकी पहचान लंबी निचली चोंच से होती है, जिससे यह पानी की सतह को छूते हुए छोटे जलीय जीव पकड़ता है। आधिकारिक राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन पेज के अनुसार गंगा बेसिन के रेतीले टापू कई नदी-पक्षियों के प्रजनन आवास हैं और मानव दबाव, बालू खनन, पशुओं की आवाजाही, शिकारियों का दबाव तथा अचानक जल-स्तर बदलाव इनके घोंसलों को प्रभावित करते हैं। इसी पेज में भारतीय स्किमर को वैश्विक रूप से संकटग्रस्त बताया गया है और भारत में इसकी 90% से अधिक प्रजनन आबादी होने की बात कही गई है।

RAS और UPSC की तैयारी में यह मुद्दा पर्यावरण, जैव विविधता, नदी पुनर्जीवन और सरकारी कार्यक्रमों से जुड़े मुद्दे के रूप में पूछा जा सकता है, खासकर पर्यावरण और पारिस्थितिकी हिस्से में। प्रीलिम्स में संस्था-परियोजना मिलान, प्रजाति-आवास, खतरे और गंगा बेसिन से जुड़े तथ्य उपयोगी हैं। मुख्य परीक्षा में यह उदाहरण दिखाता है कि नदी सफाई केवल पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है; नदी के रेतीले आवास, स्थानीय समुदाय, निगरानी और हर स्थल के हिसाब से संरक्षण योजना भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। स्टैटिक जीके में इसे संकटग्रस्त पक्षियों, नदी पारिस्थितिकी और संरक्षण परियोजनाओं के साथ जोड़कर पढ़ना चाहिए।