आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि का प्रमुख चालक बना रहा। H1 FY26 में GVA वृद्धि 9.3% रही और पूरे वर्ष के लिए 9.1% अनुमानित है — यह H1 FY25 के 7% से काफी अधिक है। GDP में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 53.6% (नाममात्र) हो गई, जबकि GVA में 56.4% — अब तक का सर्वाधिक स्तर।

FY25 में सेवा निर्यात USD 387.6 अरब रहा, 13.6% वृद्धि के साथ — सर्वकालिक उच्च। भारत के वैश्विक निर्यात में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 4.3% हो गई (2005 में 2% थी)। यह वृद्धि मुख्य रूप से IT/सॉफ्टवेयर सेवाओं, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCCs), व्यापार प्रक्रिया प्रबंधन और पेशेवर सेवाओं से आई।

भारत UK, ओमान और EFTA के साथ नए व्यापार समझौतों के ज़रिए 120+ सेवा उप-क्षेत्रों में बाज़ार पहुँच बढ़ा रहा है। ये समझौते भारत को बैक-ऑफिस हब से आगे बढ़ाकर डिजिटल, AI, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं में रणनीतिक भागीदार के रूप में स्थापित करते हैं।

2022-23 से 2024-25 तक सेवा निर्यात वृद्धि औसतन 14% रही।