3 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ़ द अवेकेन्ड वन शीर्षक वाली यह प्रदर्शनी संस्कृति मंत्रालय ने आयोजित की थी। यह आयोजन एक ऐतिहासिक घर वापसी का प्रतीक था, जिसमें 127 वर्षों से अधिक समय के बाद वापस लाए गए भगवान बुद्ध के पिपरहवा रत्न अवशेषों को नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय और कोलकाता के भारतीय संग्रहालय के संग्रह में संरक्षित अवशेषों तथा अवशेष-पात्रों के साथ फिर से एक साथ रखा गया। मूल अवशेष 1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने कपिलवस्तु के प्राचीन स्तूप में खोजे थे। खोज के बाद इनके हिस्से दुनिया के अलग-अलग स्थानों पर भेजे गए: एक स्याम के राजा को उपहार में दिया गया, दूसरा इंग्लैंड ले जाया गया और तीसरा कोलकाता के भारतीय संग्रहालय में संरक्षित किया गया। 2025 में विश्वभर के बौद्ध समुदायों के समर्थन से संस्कृति मंत्रालय के निर्णायक हस्तक्षेप से पेप्पे परिवार के पास रहा हिस्सा भारत वापस लाया गया। यह प्रदर्शनी पहली बार वापस लाए गए अवशेषों को पिपरहवा से प्राप्त प्रामाणिक पुरातात्विक सामग्री के साथ एक ही जगह प्रस्तुत करती है। इसमें पिपरहवा पुनर्दृष्टि, बुद्ध के जीवन के क्षण, मूर्त में अमूर्त: बौद्ध शिक्षाओं की सौंदर्य भाषा और सीमाओं के पार बौद्ध कला एवं आदर्शों का विस्तार जैसे विषयगत खंड भी शामिल हैं। क़िला राय पिथौरा के प्रदर्शनी क्षेत्र को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने विशेष रूप से संयोजित किया है और इसमें बौद्ध कला तथा वास्तुकला के प्रतिमानों की छाप दिखाई देती है। यह 4 जनवरी 2026 से आम जनता के लिए खुला।
प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी द लाइट एंड द लोटस का उद्घाटन किया। संस्कृति मंत्रालय की इस प्रदर्शनी में 127 वर्षों के बाद वापस लाए गए रत्न अवशेषों को राष्ट्रीय संग्रहालय और कोलकाता के भारतीय संग्रहालय की कलाकृतियों के साथ एक साथ प्रदर्शित किया गया है।
मुख्य तथ्य
- प्रधानमंत्री मोदी ने 3 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया
- प्रदर्शनी का शीर्षक द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकेन्ड वन है और इसका आयोजन संस्कृति मंत्रालय ने किया है
- भगवान बुद्ध के पिपरहवा रत्न अवशेष पेप्पे परिवार संग्रह से 127 वर्षों से अधिक समय बाद भारत वापस लाए गए
- मूल अवशेष 1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे द्वारा कपिलवस्तु के प्राचीन स्तूप में खोजे गए
- इस प्रदर्शनी में वापस लाए गए अवशेषों को नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय तथा कोलकाता के भारतीय संग्रहालय की कलाकृतियों के साथ एक ही स्थान पर रखा गया है
- क़िला राय पिथौरा के प्रदर्शनी क्षेत्र को ASI द्वारा संयोजित किया गया; यह 4 जनवरी 2026 से जनता के लिए खुला
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: नई दिल्ली में उद्घाटित पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के पुरातात्विक एवं सभ्यतागत महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
प्रधानमंत्री मोदी ने 3 जनवरी 2026 को राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में 1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे द्वारा कपिलवस्तु स्तूप पर खोजे गए अवशेषों को राष्ट्रीय संग्रहालय और कोलकाता के भारतीय संग्रहालय की सामग्री सहित फिर एक साथ प्रस्तुत किया गया।
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प्रधानमंत्री मोदी ने 3 जनवरी 2026 को भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया था। ये अवशेष मूल रूप से किस वर्ष खोजे गए थे?
पिपरहवा अवशेष मूल रूप से 1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे द्वारा कपिलवस्तु के प्राचीन स्तूप में खोजे गए थे। पेप्पे परिवार संग्रह से 127 वर्षों से अधिक समय बाद इन्हें भारत वापस लाया गया और नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में उद्घाटित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में मौजूदा अवशेषों के साथ पुनर्मिलित किया गया।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
3 जनवरी 2026 को पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किसने किया?
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
पिपरहवा अवशेष प्रदर्शनी का शीर्षक क्या है?
प्रदर्शनी का शीर्षक द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकेन्ड वन है और इसका आयोजन संस्कृति मंत्रालय ने किया है।
पिपरहवा अवशेष मूल रूप से कब और किसके द्वारा खोजे गए थे?
पिपरहवा अवशेष 1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने कपिलवस्तु के प्राचीन स्तूप में खोजे थे।
पिपरहवा अवशेष प्रदर्शनी जनता के लिए कब खोली गई?
क़िला राय पिथौरा की प्रदर्शनी, जिसे ASI ने संयोजित किया है, 4 जनवरी 2026 से जनता के लिए खुली।
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