प्रकाशित: 3 फ़रवरी 2026PIBशासन
NAMASTE योजना: 1.52 लाख कचरा बीनने वालों की पहली राष्ट्रीय गणना में 84.5% SC/ST/OBC समुदाय से
3–4 फरवरी 2026 को केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने संसद में NAMASTE (राष्ट्रीय यांत्रिक स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई) योजना के तहत 35 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 1.52 लाख कचरा बीनने वालों की गणना से जुड़े सामाजिक आंकड़े पहली बार प्रस्तुत किए। आंकड़ों के अनुसार 84.5% कचरा बीनने वाले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं, जिससे खतरनाक स्वच्छता कार्य में जातिगत व्यावसायिक पृथक्करण की प्रणालीगत समस्या रेखांकित होती है।
कचरा बीनने वालों को नए घटक के रूप में शामिल करने के बाद NAMASTE अब 2.5 लाख व्यक्तियों की गणना का लक्ष्य रखती है। इस योजना में शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) द्वारा औपचारिक मान्यता, PPE किट, PM जीवन ज्योति बीमा और PM सुरक्षा बीमा, PMKVY के तहत कौशल विकास और एकमुश्त नकद सहायता दी जाती है। NAMASTE को सीवर और सेप्टिक टैंक श्रमिकों के कल्याण के लिए वित्त वर्ष 2023-24 में शुरू किया गया था और कचरा बीनने वालों को वित्त वर्ष 2024-25 से लक्षित समूह के रूप में जोड़ा गया।
राजस्थान में 17.8% SC और 13.5% ST जनसंख्या के साथ NAMASTE के प्रभावी क्रियान्वयन का राज्य में सम्मानजनक आजीविका के लिए महत्वपूर्ण महत्व है।
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6-अक्ष वर्गीकरण
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
नमस्ते के तहत पहचाने गए कचरा बीनने वालों का कितना प्रतिशत एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग से है?
व्याख्या · सही उत्तर Dनमस्ते के तहत पहचाने गए 1.52 लाख कचरा बीनने वालों में से 84.5% एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग से हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
NAMASTE योजना क्या है और इसकी गणना से क्या पता चला?
NAMASTE (राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र कार्य) योजना ने कचरा बीनने वालों की भारत की पहली राष्ट्रीय गणना की जिसमें 35 राज्यों में 1.52 लाख लोग चिन्हित हुए। आंकड़ों से पता चला कि इनमें से 84.5% SC/ST/OBC समुदाय से हैं।
NAMASTE योजना के आंकड़े संसद में कब प्रस्तुत किए गए?
NAMASTE योजना के आंकड़े 3-4 फरवरी 2026 को संसद में प्रस्तुत किए गए। यह पहली बार था जब कचरा बीनने वालों पर इतना व्यापक डेटा आधिकारिक रूप से संसद के सामने रखा गया।
NAMASTE के आंकड़े भारत में जाति और स्वच्छता कार्य के बारे में क्या बताते हैं?
आंकड़े बताते हैं कि स्वच्छता कार्य में जाति-आधारित पेशागत बँटवारा गहराई से मौजूद है, क्योंकि 84.5% कचरा बीनने वाले SC/ST/OBC समुदाय से हैं। यह भारत में निम्न जातियों और स्वच्छता व्यवसायों के ऐतिहासिक संबंध को दर्शाता है।
NAMASTE योजना के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?
NAMASTE का लक्ष्य स्वच्छता कार्य का मशीनीकरण करना और कचरा बीनने वालों को वैकल्पिक आजीविका प्रदान करना है। यह योजना इस कार्यबल को औपचारिक पहचान दिलाने तथा उन्हें कल्याण लाभ और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने पर भी ध्यान देती है।
RAS अभ्यर्थियों के लिए NAMASTE गणना क्यों महत्वपूर्ण है?
यह गणना ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे वर्ग के लिए औपचारिक मान्यता और कल्याण लाभों की दिशा में पहला कदम है। यह RAS पाठ्यक्रम के सामाजिक न्याय, शासन और भारतीय समाज खंडों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जाति, श्रम और नीति के अंतर्संबंध को रेखांकित करती है।