3 दिसंबर 2025 को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस (IDPD) पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में दिव्यांगजन सशक्तीकरण के राष्ट्रीय पुरस्कार 2025 प्रदान किए। 2025 का विषय 'सामाजिक प्रगति के लिए दिव्यांग समावेशी समाज का निर्माण' था। इसमें इस बात पर बल दिया गया कि सतत विकास के लिए दिव्यांगजनों का समावेश अनिवार्य है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि दिव्यांगजन समानता के हकदार हैं और राष्ट्रीय विकास में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करना सभी संबंधित पक्षों का कर्तव्य है; यह दान का विषय नहीं है। प्रमुख सरकारी पहल हैं: सुगम्य भारत अभियान; दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन की योजना (SIPDA); दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक यंत्र एवं उपकरण खरीदने और लगवाने में सहायता की योजना (ADIP), जिसके तहत निःशुल्क सहायक उपकरण दिए जाते हैं; विशिष्ट दिव्यांगता पहचान-पत्र (UDID), जो लाखों की संख्या में जारी किए जा चुके हैं; और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016, जिसने विकलांगता की श्रेणियाँ 7 से बढ़ाकर 21 कीं और नौकरियों में 4% क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान किया। जनगणना 2011 के अनुसार भारत में लगभग 2.68 करोड़ दिव्यांगजन हैं। राजस्थान में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग पालनहार योजना के तहत दिव्यांग या बेसहारा माता-पिता के बच्चों को ₹1,500 प्रति माह देता है। विभाग विकलांगता पेंशन, निःशुल्क सहायक उपकरण शिविर, दिव्यांगजनों के लिए छात्रावास और विशेष विद्यालय भी चलाता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 2025-26 में 100% UDID कार्ड कवरेज की प्रतिबद्धता जताई।