28 जनवरी 2026 की यह खबर जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग पर्यटन स्थल पर भारी बर्फ़बारी के बाद आए कई भीषण हिमस्खलनों के बारे में है। इनमें इमारतें और वाहन दब गए, जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित हुआ और सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और सेना ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। परीक्षा की दृष्टि से यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हिमालयी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, परिवहन संपर्क, पर्यटन सुरक्षा और रणनीतिक रसद व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण उदाहरण है।

सोनमर्ग कश्मीर के गांदरबल जिले का एक लोकप्रिय पर्वतीय पर्यटन स्थल है। यह जोजिला दर्रे तक जाने वाले मार्ग, श्रीनगर-लेह मार्ग, अमरनाथ यात्रा के आधार स्थल और थाजीवास ग्लेशियर से जुड़ा होने के कारण महत्वपूर्ण है। इस इलाके में सर्दियों की भारी बर्फ़बारी के कारण सड़क संपर्क मुश्किल हो जाता है। इसी संदर्भ में ज़ेड-मोड़ या सोनमर्ग सुरंग महत्वपूर्ण है। यह गगनगीर और सोनमर्ग को जोड़ने वाली 6.4 किमी लंबी, दो ट्यूब वाली सुरंग है। प्रधानमंत्री मोदी ने 13 जनवरी 2025 को इसका उद्घाटन किया था। इसका उद्देश्य सोनमर्ग तक हर मौसम में सड़क संपर्क बेहतर करना है।

प्रीलिम्स में सोनमर्ग का स्थान, राष्ट्रीय राजमार्ग 44 और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) व सेना जैसी बचाव एजेंसियों की भूमिका से सवाल पूछे जा सकते हैं। मेंस के उत्तरों में इस घटना का उपयोग आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पहाड़ी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे, पर्यटन से जुड़ी अर्थव्यवस्था और संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों तक संपर्क के उदाहरण के रूप में किया जा सकता है। मुख्य सीख यह है कि हिमालयी विकास में सड़क और सुरंग निर्माण के साथ मौसमी जोखिमों से निपटने की योजना, चेतावनी प्रणाली और तेज़ प्रतिक्रिया की क्षमता को भी उतना ही महत्व देना ज़रूरी है।