5 जून 2025 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा बीड पपड़ लेपर्ड सफारी के उद्घाटन के साथ जयपुर दुनिया का पहला ऐसा शहर बन गया, जहां तीन समर्पित लेपर्ड सफारी हैं। ये तीन सफारी — जहलाना, अमागढ़ और बीड पपड़ — जयपुर की शहरी और अर्ध-शहरी सीमा के भीतर संचालित होती हैं। जहलाना लेपर्ड सफारी, भारत का पहला तेंदुआ अभयारण्य, जयपुर शहर के केंद्र में स्थित है और वर्तमान में यहां 40 से अधिक तेंदुए तथा 5 शावक हैं। नवनिर्मित बीड पपड़ लेपर्ड सफारी नाहरगढ़ अभयारण्य में 5,240 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है, जिसमें 19 किमी का सफारी ट्रैक, 12 जलकुंड और पुनर्स्थापित घास के मैदान हैं। 2025 में जयपुर के वन्यजीव स्थलों पर पाँच लाख से अधिक पर्यटक आए। जयपुर का यह मॉडल शहरी विस्तार और जैव विविधता संरक्षण को साथ लेकर चलने का विश्व-स्तरीय उदाहरण है।
जयपुर तीन लेपर्ड सफारी वाला विश्व का पहला शहर बना: जून 2025 में बीड पपड़ सफारी का उद्घाटन, जहलाना और अमागढ़ के बाद तीसरी
जयपुर विश्व का पहला शहर बन गया है जहाँ तीन समर्पित लेपर्ड सफारी हैं। 5 जून 2025 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बीड पपड़ लेपर्ड सफारी का उद्घाटन किया। ये तीनों सफारी — जहलाना, अमागढ़ और बीड पपड़ — जयपुर की शहरी और अर्ध-शहरी सीमा के भीतर संचालित होती हैं। जहलाना लेपर्ड सफारी, भारत का पहला तेंदुआ अभयारण्य, जयपुर शहर के केंद्र में स्थित है और वर्तमान में 40 से अधिक तेंदुओं और 5 शावकों का आवास है। नवनिर्मित बीड पपड़ लेपर्ड सफारी नाहरगढ़ अभयारण्य में 5,240 हेक्टेयर में फैली है, जिसमें 19 किमी का सफारी ट्रैक, 12 जलकुंड और पुनर्स्थापित घास के मैदान हैं। 2025 में जयपुर के वन्यजीव स्थलों पर पाँच लाख से अधिक पर्यटक आए। जयपुर का यह मॉडल शहरी विस्तार और जैव विविधता संरक्षण को साथ लेकर चलने का विश्व-स्तरीय उदाहरण है।
मुख्य तथ्य
- CM भजनलाल शर्मा ने 5 जून 2025 को जयपुर की तीसरी बीड पपड़ लेपर्ड सफारी का उद्घाटन किया।
- झालाना में 40 से अधिक तेंदुए और 5 शावक हैं और यह भारत का पहला शहरी तेंदुआ अभयारण्य है।
- बीड पपड़ नाहरगढ़ अभयारण्य 5,240 हेक्टेयर में फैला है; इसमें 19 किमी का सफारी ट्रैक और 12 जलकुंड हैं।
- 2025 में जयपुर के वन्यजीव स्थलों पर पाँच लाख से अधिक पर्यटक आए और रिकॉर्ड राजस्व मिला।
- जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा झालाना से मात्र 6 किमी दूर है, इसलिए वहाँ पहुँचना अत्यंत आसान है।
- जयपुर मॉडल दिखाता है कि तेंदुए और महानगरीय शहर साथ-साथ रह सकते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जयपुर को तीन लेपर्ड सफारी वाला विश्व का पहला शहर क्यों कहा जाता है?
5 जून 2025 को बीड पपड़ लेपर्ड सफारी के उद्घाटन के बाद जयपुर को यह विशेष दर्जा मिला। जहलाना और अमागढ़ सफारी पहले से मौजूद थीं, और बीड पपड़ इनके साथ तीसरी लेपर्ड सफारी बन गई। ये तीनों सफारी शहर की शहरी और अर्ध-शहरी सीमाओं के भीतर चलती हैं। विश्व में किसी अन्य शहर की नगरपालिका सीमाओं के भीतर तीन समर्पित लेपर्ड सफारी नहीं हैं।
बीड पपड़ लेपर्ड सफारी का उद्घाटन कब और किसने किया?
बीड पपड़ लेपर्ड सफारी का उद्घाटन 5 जून 2025 को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया। यह नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में 5,240 हेक्टेयर में फैली है और इसमें 19 किमी सफारी ट्रैक तथा 12 जलकुंड हैं।
भारत में जहलाना लेपर्ड सफारी का क्या महत्व है?
जहलाना लेपर्ड सफारी भारत का पहला शहरी तेंदुआ अभयारण्य है, जो जयपुर शहर के बीचों-बीच स्थित है। इसमें वर्तमान में 40 से अधिक तेंदुए और 5 शावक हैं। यह जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मात्र 6 किमी दूर है, इसलिए यह देश के सबसे आसानी से पहुँचे जा सकने वाले वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है।
2025 में जयपुर के वन्यजीव स्थलों पर कितने पर्यटक आए और इसका आर्थिक प्रभाव क्या था?
2025 में जयपुर के वन्यजीव स्थलों पर 5 लाख से अधिक पर्यटक आए, जिससे राज्य को रिकॉर्ड राजस्व मिला। पर्यटन में यह बढ़ोतरी शहरी वन्यजीव संरक्षण के आर्थिक महत्व और जयपुर लेपर्ड सफारी मॉडल की सफलता को दिखाती है।
जयपुर लेपर्ड सफारी मॉडल कौन-सा व्यापक संरक्षण संदेश देता है?
जयपुर मॉडल बताता है कि तेंदुए और महानगरीय शहर साथ-साथ रह सकते हैं। यह शहरी वन्यजीव संरक्षण का वैश्विक उदाहरण है। तीनों सफारी जयपुर की शहरी और अर्ध-शहरी सीमाओं के भीतर संचालित हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि सघन आबादी वाले क्षेत्रों में भी वन्यजीव आवास संरक्षित किए जा सकते हैं।
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