प्रकाशित: 11 फ़रवरी 2026बिज़नेस स्टैंडर्डअर्थव्यवस्था
भारत-अमेरिका व्यापार ढांचा: किसान संगठनों ने कृषि बाजार खोलने के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान किया
फरवरी 2026 के मध्य में, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) से जुड़े किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। उनकी चिंता उन प्रावधानों को लेकर थी जिनसे भारतीय कृषि बाजार अमेरिकी उत्पादों के लिए खुल सकते हैं। किसान संगठनों का तर्क था कि अमेरिकी कृषि वस्तुओं — विशेषकर डेयरी उत्पाद, पोल्ट्री, मक्का, सोया और गेहूं — के बिना रोक-टोक प्रवेश से भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर होगी और ग्रामीण आजीविका खतरे में पड़ेगी।
मांग है कि कृषि क्षेत्र को व्यापार समझौते से बाहर रखा जाए — EU और अन्य भागीदारों के साथ पहले की FTA वार्ताओं की तरह। राजस्थान — जहां ग्रामीण कार्यबल का 62% से अधिक कृषि से जुड़ा है — के लिए ऐसे प्रावधानों का बड़ा असर हो सकता है। राज्य का डेयरी क्षेत्र (सरस ब्रांड, RCDF), तिलहन और मसाला निर्यात पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना बाजार खुलने पर बढ़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकते हैं।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे पर किसान संगठनों की चिंताओं तथा भारत के 14 करोड़ किसान परिवारों एवं राजस्थान की कृषि-ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभावों की जांच कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
लगभग 12 फरवरी 2026 को संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे के खिलाफ प्रदर्शन किया। चिंता यह है कि शुल्क-मुक्त अमेरिकी डेयरी, पोल्ट्री, मक्का, सोया एवं गेहूं भारत के 14 करोड़ किसान परिवारों को नुकसान पहुंचाएंगे। राजस्थान में, जहां 62% से अधिक ग्रामीण श्रमिक कृषि पर निर्भर हैं, सरस डेयरी, तिलहन एवं मसाले एमएसपी संरक्षण के बिना तीव्र प्रतिस्पर्धा झेलेंगे।
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जुड़ा प्रश्नआसान
फरवरी 2026 में भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार रूपरेखा के खिलाफ किसान संगठनों के विरोध के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?
व्याख्या · सही उत्तर Dफरवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों पर आई रिपोर्टों के अनुसार संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े संगठनों सहित किसान समूहों ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार रूपरेखा का विरोध किया। उनकी चिंता थी कि अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों के लिए शुल्क घटने और बाजार पहुंच बढ़ने से भारतीय किसान, डेयरी उत्पादक, छोटे कारोबारी और ग्रामीण कामगार सस्ते सब्सिडी वाले आयात के मुकाबले कमजोर पड़ सकते हैं। इसलिए सही कथन यह है कि विरोध आजीविका और कृषि-सुरक्षा से जुड़ी आशंकाओं के आधार पर था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संयुक्त किसान मोर्चा ने फरवरी 2026 में भारत-अमेरिका व्यापार ढाँचे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान क्यों किया?
संयुक्त किसान मोर्चा ने 12 फरवरी 2026 के आसपास इस आशंका के कारण विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से अमेरिकी डेयरी, पोल्ट्री, मक्का और सोया उत्पाद भारतीय कृषि बाजार में आ जाएंगे। किसानों को डर था कि सस्ते अमेरिकी आयात से घरेलू कीमतें गिरेंगी और भारत के लगभग 14 करोड़ किसान परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ेगी।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) क्या है और भारतीय कृषि राजनीति में इसकी क्या भूमिका है?
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) किसान संघों का एक गठबंधन है, जो 2020-2021 के कृषि कानून विरोधी आंदोलन के दौरान चर्चा में आया। इसी आंदोलन के बाद तीन विवादास्पद कृषि सुधार कानून वापस लिए गए। SKM भारत के किसान समुदाय के एक बड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है।
WTO के तहत कृषि बाजार उदारीकरण पर भारत का ऐतिहासिक रुख क्या रहा है?
भारत ने खाद्य सुरक्षा चिंताओं, लघु एवं सीमांत किसानों की सुरक्षा और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली बनाए रखने की आवश्यकता का हवाला देते हुए WTO के तहत कृषि बाजार उदारीकरण का ऐतिहासिक रूप से विरोध किया है। भारत G33 गठबंधन का हिस्सा है जो WTO वार्ता में विशेष उत्पादों और सुरक्षा तंत्रों की पैरवी करता है।
द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में अमेरिकी माँगें भारत के कृषि हितों से कैसे टकराती हैं?
अमेरिका लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में भारत से डेयरी, पोल्ट्री और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों पर उच्च आयात शुल्क घटाने की माँग करता आया है। भारत घरेलू किसानों और खाद्य सुरक्षा की रक्षा के लिए ऊँचे शुल्क बनाए रखता है, जिससे अमेरिका की बाजार पहुँच संबंधी माँगों के साथ मौलिक टकराव होता है।
व्यापार नीति बहस के संदर्भ में भारत के 14 करोड़ किसान परिवारों का क्या महत्व है?
भारत के लगभग 14 करोड़ किसान परिवार आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। इसलिए कृषि व्यापार नीति एक संवेदनशील सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक मुद्दा बन जाती है। कोई भी व्यापार समझौता, जिससे सस्ते आयात के कारण घरेलू कीमतें गिर सकती हों, ग्रामीण आय और खाद्य सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।